वहीं देवी सिंह का कहना था कि बस्ती के ज्यादातर लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हैं। ऐसे में 15 दिन में दूसरी जगह व्यवस्था कहां से कर पाएंगे। रेलवे पुलिस रोजाना परेशान कर रही है। कुछ मकान तो आगे से तोड़ भी दिए हैं, ताकि पूरी तरह टूटने से बच जाएं, लेकिन रेलवे प्रशासन पूरी तरह मकान हटाने पर आमादा है।
मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन
मोती महल में गरीबों के घर तोड़ने के विरोध में बसपा जिलाध्यक्ष विमल कुमार वर्मा ने शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल के साथ मंडलायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि यहां के विस्थापितों को कांशीराम योजना के खाली आवासों का आवंटन किया जाए या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना में जगह दी जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में संदीप मुखरैया, सत्तार उस्मानी, अरविंद मथुरिया, संतोष चक, नवाब सिंह मौर्य, पार्षद हरिमोहन, संतोष चक, यासीन अब्बास आदि थे।
यहां रहता है वीरता पुरस्कार से सम्मानित शहंशाह का परिवार
बस्ती में ही वर्ष 2012 में यमुना में डूबते बच्चों को बचाने वाले शहंशाह का घर भी है। शहंशाह मजदूरी करता है। उसके पिता बिश्वा ने बताया कि शहंशाह को आठ साल पहले राष्ट्रपति का वीरता पुरस्कार मिल चुका है। परिवार करीब 40 साल से यहां रहा है।