चाईनीज झालरों को छोड़ दीपकों से होगी घर-घर रोशनी
लोकल को वोकल बना रहे हुनरमंद, चाइनीज आइटमों को कह दिया अलविदा
चाईनीज झालरों को छोड़ दीपकों से होगी घर-घर रोशनी
सतेंद्र धाकरे
टूंडला। इस दीपोत्सव पर घरों में कुछ अलग तरह की रोशनी होती नजर आएगी। दीवाली के त्योहार पर इस बार घर-घर चाईनीज झालरों को छोड़ मिट्टी के दीपों से रोशनी की जाएगी। इसके लिए हुनरमंदों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। इससे लोकल को वोकल बनाने की राह आसान होगी। इसके लिए अब मिट्टी के दीपकों की बिक्री के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा भी लिया जाने लगा है।
हर बार दीपों के त्योहार पर घर-घर में सजने वाली चाइनीज झालरों का क्रेज खत्म होता नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना लोकल को वोकल बनाने की राह हाथों के हुनरमंदों ने आसान कर दी है। मिट्टी के दीपकों को बनाने वाले कुंभकारों का कहना है कि इस बार दीपावली के त्योहार के नजदीक आने के साथ ही मिट्टी के दीपकों की डिमांड भी बढ़ती जा रही है। बाजार में अधिकांश दुकानें मिट्टी के दीपकों की जमकर बिक्री कर रही हैं।
खास बात ये है कि इस बार बाजार के दुकानदार इन दीपकों के लिए नगर में हम जैसे कुंभकारों को ही आर्डर दे रहे हैं। जबकि हर बार 40 फीसदी से अधिक दीपकों का माल आगरा या फिरोजाबाद से ही आता था, लेकिन इस बार हमें ऑर्डर मिलने के कारण हम लोगों के दीपकों की अच्छी बिक्री हो रही है। बाजार में दीपकों की डिमांड बढ़ने के कारण हम लोग प्रतिदिन दो से तीन हजार दीपक बना रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का ले रहे सहारा
टूंडला। दीपकों की बिक्री न सिर्फ बाजार के दुकानदार अपनी दुकानों से बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इनके आर्डर के लिए लोगों को अधिक खरीद के लिए आकर्षित कर रहे हैं। लोगों के ऑर्डर आने पर दुकानदार अन्य सामानों के साथ दीपकों की भी होम डिलीवरी कर रहे हैं।
सामान के साथ दीपकों की भी कर रहे होम डिलीवरी
टूंडला। परचून दुकानदार सन्नी जैन, विपिन जैन, राजीव वार्ष्णेय बताते हैं कि वे घर के अन्य सामानों के साथ दीपकों की भी ऑनलाइन डिलीवरी कर रहे हैं। एक हजार रुपये के सामान के साथ 20 दीपक लोगों के घरों तक पहुंचा रहे हैं। इससे अपने देश की मिट्टी से बने दिए लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
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