छत्रपति शिवाजी म्यूजियम के जरिए ब्रज क्षेत्र की जीवंत विरासत और कलाओं से पर्यटकों को रूबरू कराया जाए। इसके लिए म्यूजियम में बनाए जाने वाले ऑडिटोरियम में प्रतिदिन ब्रज क्षेत्र की लोक कलाओं, रास लीला, भगत व संगीत के कार्यक्रम होने चाहिए ताकि पर्यटक रात्रि में भी रुक सके। यह मांग आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन (एडीएफ) के अध्यक्ष पूरन डावर एवं सचिव केसी जैन ने मुख्यमंत्री से की है। एडीएफ ने यह सुझाव दिए हैं।
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- संगीत नृत्य व स्थानीय संस्कृति के प्रतिदिन शो कराए जाएं।
- क्रांतिकारियों, साहित्यकारों व राजनीतिज्ञों की मोम प्रतिमाएं लगें।
- स्थानीय व प्रवासी पक्षियों व प्राकृतिक स्थलों की जानकारी।
- जरदोजी, इनले वर्क, मूर्तिकला, कालीन कला प्रदर्शित की जाए।
- तैराकी मैला, गनगौर मेला, बटेश्वर मेला आदि मेलों की जानकारी हो।
- सेठों की रावतपाड़ा, बेलनगंज व राजामंडी की हवेलियों का ब्यौरा हो।
- फुटवियर सिटी के रूप में परिचय, पेंटिंग के जरिए पेठा निर्माण प्रक्रिया दिखाएं।
- हिंदी साहित्यकार अमृतलाल नागर व राम विलास शर्मा का परिचय मिले।
- एक गैलरी जनकवि नजीर अकबराबादी पर प्रदर्शित की जाए।
- जैन धर्म के शौरीपुर व बटेश्वर के इतिहास से रूबरू कराने को गैलरी हो।
- लाल ताजमहल (कैथोलिक सिमेट्री) सेंट पीटर्स चर्च व अकबरी चर्च का इतिहास हो।
- विशेषज्ञों की समिति का गठन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का प्रयास किया जाए।
- म्यूजियम का संचालन अंतरराष्ट्रीय स्तर की निजी संस्था से कराएं, सरकारी से उम्मीद नहीं।