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UP: ऑपरेशन के बाद भी नहीं लौटी रोशनी, आंख से बहने लगा था खून; 19 साल बाद डॉक्टर को देने पड़े 2.18 लाख रुपये

Sun, 12 Apr 2026 09:06 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

वादी ने डॉ. अशोक पचौरी लेजर साइट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जांच कराई तो डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। 12 अप्रैल, 2001 को 10 हजार रुपये फीस लेकर ऑपरेशन किया गया। दूसरे दिन बाईं आंख की पट्टी हटने पर आंख की रोशनी पहले से भी कम थी।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का आदेश - फोटो : ANI
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विस्तार
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आंख का ऑपरेशन कराने के बाद भी रोशनी नहीं लौटी। जांच में पता चला कि डॉक्टर की लापरवाही से काॅर्निया भी खराब हो गई। वाद दायर होने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव कुमार ने डॉ. अशोक पचौरी लेजर साइट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 2.18 लाख रुपये का चेक जमा कराकर पीड़ित को सौंपा।
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थाना शाहगंज क्षेत्र के एमआईजी निवासी जोगिंदर सिंह ने 5 अप्रैल, 2006 को वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि उनकी आंखों में मोतियाबिंद की शिकायत थी। उन्होंने डॉ. अशोक पचौरी लेजर साइट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जांच कराई तो डॉक्टर ने ऑपरेशन की सलाह दी। 12 अप्रैल, 2001 को 10 हजार रुपये फीस लेकर ऑपरेशन किया गया। दूसरे दिन बाईं आंख की पट्टी हटने पर आंख की रोशनी पहले से भी कम थी।
 
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शिकायत पर इलाज में कोई सुधार नहीं हुआ। बाद में उन्होंने शाहगंज में ही डॉ. संजय सेन के अस्पताल में जांच कराई और डॉ. आरबी सक्सेना से मिले। उनके पर्चे लेकर वह विपक्षी से मिले तो 13 जून, 2001 को फिर ऑपरेशन किया लेकिन रोशनी नहीं लौटी। इसके बाद उन्होंने 7 जुलाई, 2001 को डॉ. आरबी सक्सेना से राय ली। उन्होंने जांच कर बताया कि आंख पर लेंस ठीक से फिट नहीं होने से काॅर्नियां खराब हो गई।

विपक्षी ने इसके बाद भी 15 से 20 दिन में ठीक करने का वादा कर इलाज किया। आंख की रेटिना से खून बहने लगा तो दिल्ली में इलाज कराया। डॉक्टर की लापरवाही से उनका काफी खर्चा हुआ। 22 मई, 2006 को जिला उपभोक्ता आयोग ने वादी के हक में फैसला सुनाया। विपक्षी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में अपील की, वहां से भी उसे राहत नहीं मिली।
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