फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खतरे में हजारों विद्यार्थियों की जान

Wed, 03 Aug 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
स्‍कूूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
विज्ञापन
विद्यार्थियों को परिषदीय स्कूलों में लाने के लिए सरकारें करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं। जो पढ़ रहे हैं, उनको सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराई जा रहीं। हजारों विद्यार्थियों की जान खतरे में हैं। भवन जर्जर हो गए हैं, स्कूलों की दीवारें, छत और बाउंड्रीवाल गिर रहे हैं।
विज्ञापन

जिले के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में करीब ढाई लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2015-16 में 2,45,660 विद्यार्थियों का पंजीकरण था। अधिकतर विद्यालयों के भवन जर्जर हो गए हैं। बारिश में छतों से पानी टपक रहा है। स्कूल प्रांगण के साथ कक्षों में पानी भर गया है। छतों का लेंटर गिर रहा है। विद्यार्थी से लेकर शिक्षक इनके नीचे बैठकर ही पठन-पाठन कर रहे हैं।

ये है हाल
 नवीन प्राथमिक कन्या विद्यालय, सिकंदरा में पूर्वाह्न 11:45 बजे अमर उजाला की टीम पहुंची तो महज आठ से दस विद्यार्थी मौजूद मिले। पंजीकरण 50 बच्चों का है। प्रधानाध्यापिका बीना सागर ने बताया कि छोटे बच्चों को वापस भेज दिया। स्कूल खुला तो सभी कमरों में पानी भरा था। तीन कक्ष हैं, तीनों के छतों से पानी टपकता है। विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों ने मिलकर पानी निकला। गत वर्ष सहायक अध्यापिका के सिर पर लेंटर गिर गया था। स्कूल के मरम्मत के लिए विभाग को लिखा गया, बजट तो नहीं मिला, लेकिन सुरक्षित स्थान पर बैठने की सलाह जरूर दी गई। न्यू आगरा स्थित स्कूल के प्रांगण सहित कमरों में पानी भरा है। रुई की मंडी, वजीरपुरा और बल्केश्वर के स्कूलों का लेंटर गिर रहा है। ऐसे तमाम विद्यालय हैं।   
विज्ञापन



महज पांच हजार रुपये का बजट
 विद्यालय विकास अनुदान के नाम पर महज पांच हजार रुपये वार्षिक दिए जाते हैं। इसमें विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई ठीक से नहीं हो पाती, मरम्मत की बात दूर रही। चालू सत्र में कुछ स्कूलों को पांच हजार रुपये भी दो चरणों में दिए गए।  

नए भवनों की दशा खराब
पुराने के साथ नए विद्यालय भवनों की भी दशा खराब है। निर्माण के समय ध्यान नहीं दिया गया। खंदौली ब्लाक स्थित प्राथमिक विद्यालय सराय दयारूपा के नव निर्मित अतिरिक्त कक्ष की दीवार एक हफ्ते पहले गिर गई। अच्छा यह रहा कि उस समय विद्यार्थी नहीं थे। मंसुखपुरा स्कूल की बाउंड्रीवाल का निर्माण भी वर्ष 2011 में ही हुआ था।


बड़ी संख्या में स्कूल भवन जर्जर हो चुके हैं। मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। जर्जर भवनों की सूची खंड शिक्षा अधिकारियों से मंगाई गई है। मरम्मत का प्रस्ताव भेजा जाएगा। फिलहाल प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं, विद्यार्थियों को सुरक्षित स्थान पर बैठाया जाए। ज्यादा बारिश होने पर छुट्टी कर दी जाए।
विज्ञापन

 धर्मेंद्र कुमार सक्सेना, बेसिक शिक्षा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें