यह सुनाई सजा
कोर्ट ने अभियुक्त राहुल को दोषी पाते हुए सामूहिक दुष्कर्म में आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये, हत्या में आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये और साक्ष्य नष्ट करने में तीन साल के कारावास व15 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने अर्थदंड राशि में से आधी रकम मृतका के परिजनों को भी दिलाने के आदेश किए।
यह था घटनाक्रम
- 19 मार्च 2021 को किशोरी घर से दोपहर दो बजे निकली।
- शाम चार बजे उसका शव घर से 200 मीटर की दूरी पर जंगल में मिला। उसके गले में दुपट्टा कसा हुआ था।
- किशोरी के घर से सौ मीटर की दूरी पर जंगल था। 200 मीटर की दूरी पर तालाब था।
- किशोरी की हत्या के शव को घसीटकर तालाब में फेंका गया था।
- पुलिस ने आरोपियों के पास से किशोरी के कपडे़, बोतल और चप्पल बरामद की थीं। वहीं आरोपियों की कीचड़ में सनी चप्पल भी मिली थीं।
- राहुल किशोरी के पिता की सब्जी की ठेल पर काम करता था। घटना से एक साल पहले वह उनके घर में झांक रहा था। किशोरी के चाचा ने देख लिया था। उसकी पिटाई की थी। तब से परिवार से दुश्मनी मान रहा था।
हैवानियत की हद की थी पार
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि वह किशोरी का इंतजार उसके घर के पास पानी की टंकी के पास खड़े होकर कर रहे थे। जब वो घर से बाहर निकली तो पीछे चल दिए। राहुल ने पहले पकड़ा। किशोरी ने राहुल के थप्पड़ मार दिया। वह चीखने भी लगी। राहुल ने उसके मुंह में दुपट्टा भर दिया, जिससे उसकी आवाज दब गई।
नाबालिग ने किशोरी के हाथ और पैर पकड़ लिए थे। दोनों ने दुष्कर्म किया। मुंह और नाक दबाकर किशोरी की हत्या कर दी थी। तालाब में शव फेंकने के बाद दोनों जंगल के अंदर मऊ गांव में चले गए। बाद में घर आकर कपड़े बदल लिए थे। अंतिम संस्कार में भी दोनों शामिल हुए थे।
डीएनए जांच रिपोर्ट रही अहम
केस के विवेचक निरीक्षक कमलेश सिंह ने बताया कि साक्ष्य के रूप में खून से सनी मिट्टी, आरोपियों के खून और कीचड़ से सने कपड़े, चप्पल, एवं मृतका के कपड़ों की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा था, केस में डीएनए जांच अहम रही। डीएनए के नमूने फोरेंसिक लैब गाजियाबाद भेजे गए थे। यह केस में अहम रहे।