एटा। सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त करने के लिए प्रशासन ने लेखपाल और आरआई को जमीन पर कब्जा होने की स्थिति में खामियाजा भुगतने की नसीहत दे दी है। लेखपालों को सरकारी संपत्ति पर कब्जा करने वालों को चिह्नित कर तहसील में सूची मुहैया कराने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
सरकारी संपत्ति तालाब, ढाका, चरागाह और चकमार्ग की निगरानी करने का दायित्व लेखपालों का होता है। अगर कब्जा होता है तो लेखपालों को संबंधित तहसीलदार को रिपोर्ट देकर अवगत कराने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन निरंकुश हुए लेखपाल अपने निजी लाभ के चलते सूचनाएं नहीं देते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा, लेखपालों को सरकारी संपत्ति चिह्नित कर तहसील में कब्जेदारों की सूची उपलब्ध करानी होगी। इतना ही नहीं कब्जा मुक्त कराई गई जमीन पर पुन: कब्जा हो गया तो स्पष्टीकरण भी देना होगा। लेखपालों पर कार्रवाई होने और प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती है। इतना ही नहीं ऐसे लेखपालों को भी चिह्नित किया जा रहा है जिनकी वजह से राजस्व विभाग की किरकिरी हो चुकी है।
लेखपालों के पास सरकारी जमीन का पूरा ब्योरा रहता है, उनकी जिम्मेदारी होती है कि वह जमीन पर निगरानी रखे। अगर कोई कब्जा करता है तो उसकी सूचना तहसीलदार को देनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, लेखपालों को सरकारी जमीन पर हुए कब्जे को चिह्नित करने के आदेश दिए गए है। इसके बाद अभियान चलाकर कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाईयां शुरू कर दी जाएंगी।
नंदलाल सिंह, एसडीएम सदर