स्वच्छ मोहल्लों में घरों से निकलने वाले जैविक कचरे को खाद में बदलने के लिए बड़े अपार्टमेंट और कॉलोनियों में कम्युनिटी कंपोस्टर रखवाए हैं। कम्युनिटी कंपोस्टर से स्थानीय स्तर पर ही कचरे का प्रबंध किया जा रहा है। कचरे से बनने वाली खाद को फ्लैट्स और अपार्टमेंट के लोग अपने यहां बागवानी और गमलों में प्रयोग कर रहे हैं।
नगरीय सीमा में स्थित घरों और बाजारों से रोजाना लगभग 12 से 14 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इतनी बड़ी मात्रा में कचरे का प्रबंधन करना नगर निगम के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। बढ़ते शहरीकरण और कम होती जगह की वजह से डंपिंग ग्राउंड बनाने में भी दिक्कत पेश आ रही है।
इसी को देखते हुए नगर निगम आगरा में बड़े आवासीय क्षेत्र और फ्लैट्स के अलावा 10 कॉलोनियों में कम्युनिटी कंपोस्टर रखवाए हैं। इसके अलावा लगभग 10,000 से अधिक घरों में भी लोग होम कंपोस्टिंग तकनीक के माध्यम से खाद बना रहे हैं। जैविक कचरे फल, सब्जी के अवशेष व अन्य गीले कचरे से बनने वाली खाद का उपयोग काॅलोनीवासी घरों के आसपास की जाने वाली बागवानी, हरियाली और सौंदर्यीकरण के लिए लगाए गमलों में पेड़-पौधों पर कर रहे हैं। सामुदायिक कचरे को कम्युनिटी कंपोस्टर के माध्यम से खाद में बदलने से नगर निगम पर कचरा प्रबंधन का दबाव कम हो रहा है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ रही है।
ऐसे काम करता है कंपोस्टर
मारुति सिटी कॉलोनी, महर्षिपुरम गठबंधन मैरिज होम के पास, सेंट जोंस कॉलेज, कमला नगर, डिफेंस एस्टेट और आत्मनिर्भर वार्ड में कम्युनिटी कंपोस्टर रखवाई गई हैं। कम्युनिटी कंपोस्टर में गीले कचरे को 4 से 6 हफ्ते तक रखना होता है। सूक्ष्म जीव जैविक कचरे को तोड़ते हैं, जिससे पोषक तत्वों से भरपूर खाद बनती है। कचरे में नमी का स्तर बनाए रखा जाता है ताकि सूक्ष्म जीव माइक्रो ऑर्गेनिज्म सही तरीके से कम कर सकें। इससे पहले गीले कचरे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।