मैनपुरी। स्वास्थ्य विभाग में अधिक वेतन देकर बाद में वसूली करने का मामला नया नहीं है। बीते माह भी हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में वसूली के आदेश पर रोक लगाते हुए रोके गए भुगतान करने के आदेश दिए थे। वहीं अब एक बार फिर से न्यायालय ने जिला अस्पताल के ही प्रकरण में सख्त रुख अपनाया है।
जिला अस्पताल मैनपुरी में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात रहीं रोजी टॉड को लिपिक की लापरवाही के चलते अधिक वेतन मिलता रहा। वेतनवृद्घि लगाने में ध्यान न देने के चलते स्टाफ नर्स को 2006 से 2021 तक 15 साल उन्हें निर्धारित से अधिक वेतन मिला। अक्तूबर 2021 में जब वे सेवानिवृत्त हुईं तो उनके देयकों से वसूली का आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने वसूली के आदेश को उच्च न्यायालय में गलत बताते हुए याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने 22 मई 2023 को वसूली आदेश पर रोक लगाते हुए तत्काल सेवानिवृत्त स्टाफ नर्स के देयकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। इसके बाद ही अन्य कर्मचारियों ने भी अधिक वेतन की वसूली के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने वसूली आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें कर्मचारियों को भी राहत दी है।
सीएमएस बोले मेरे कार्यकाल का नहीं है मामला
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मदनलाल से जब इस बारे में बात की गई तो वे कोई जानकारी नहीं दे सके। उन्होंने बताया कि मामला उनकी तैनाती से पूर्व का है। नियमानुसार जो सही होगा किया जाएगा। उच्च न्यायालय के आदेश का भी पालन कराया जाएगा।