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आगरा की कीठम झील में बड़ी संख्या में मछलियां मरीं, पोस्टमार्टम में सामने आई यह वजह

Sun, 23 Jun 2019 03:32 PM IST
मुकेश कुमार अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
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कीठम झील में मरी पड़ीं मछलियां l - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार की कीठम झील में शनिवार को बड़ी संख्या में मछलियां मृत पाई गईं। आगरा कैनाल से प्रदूषित पानी आने के कारण झील के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन में एकदम कमी आ गई, जिस वजह से मछलियां मरने लगीं। वन्य जीव विभाग ने सिंचाई विभाग से कीठम झील में प्रदूषित पानी की आपूर्ति रोकने के लिए कहा है।
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शुक्रवार शाम से कीठम झील के पानी में मछलियों के मरने का सिलसिला शुरू हो गया। झील में बड़ी मात्रा में मछलियां हैं। कैंप कार्यालय और भालू संरक्षण केंद्र की ओर के किनारों पर सुबह पर्यटकों ने मछलियों को मरा पाया तो वन्य जीव विभाग को सूचना दी। इनमें रोहम और कतला के साथ छह प्रजातियों की मछलियां थीं। 

बदबू आने के बाद कर्मचारियों ने मछलियों को बाहर निकलवाया। झील के पानी का सैंपल लेने के बाद कुछ मछलियों का पोस्टमार्टम कराया गया। चिकित्सकों ने मछलियों के मरने की वजह पानी में ऑक्सीजन की कमी को माना है। मृत मछलियों को मिट्टी में दफन करा दिया गया।
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झील के पानी में जम गई काई

कीठम झील के पानी में काई - फोटो : अमर उजाला
आगरा कैनाल से कीठम झील में आ रहे पानी में औद्योगिक कचरा आ रहा है। जून में यमुना में पानी की कमी के कारण आगरा कैनाल के पानी में प्रदूषण की मात्रा और बढ़ गई। केमिकल युक्त पानी झील में पहुंचा और इस पर काई की परत जम गई। 

बीते माह झील का पानी साफ रहा था, लेकिन चंद दिनों में ही पानी एकदम गंदा और काला होने लगा है। केमिकल बढ़ने से पानी में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा कम हुई और बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा बढ़ गई। इसी वजह से मछलियां मरीं।  

प्रदूषित पानी रोकने को कहा

राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट के डीएफओ आनंद कुमार ने सिंचाई विभाग से प्रदूषित पानी की आपूर्ति कीठम झील में रोकने के लिए कहा है। दरअसल, झील से ही मथुरा रिफाइनरी को पानी की आपूर्ति होती है। इसके अलावा झील में बड़ी संख्या में कछुए और अन्य जलीय जीव हैं, जो सांस लेने के लिए बार-बार बाहर नजर आते रहे। 
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आगरा कैनाल में पानी नहीं, एसिड ज्यादा

230 किमी लंबी आगरा कैनाल दिल्ली से आगरा के बीच बेहद प्रदूषित है। इसमें पानी नहीं, बल्कि दिल्ली का सीवर और औद्योगिक कचरा ज्यादा मिल रहा है। 1874 में अंग्रेजों द्वारा बनवाई गई आगरा कैनाल 1904 तक परिवहन के लिए इस्तेमाल की गई, फिर इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया गया।

अब प्रदूषण के कारण कैनाल का पानी न तो पीने, सिंचाई और बिल्डिंग निर्माण कार्य में उपयोग लायक नहीं रह गया है। इसमें अमोनिया, निकिल, लेड ही नहीं एंडोसल्फान, डीडीटी जैसे कीटनाशक भी ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं। दिल्ली और फरीदाबाद का औद्योगिक कचरा इसका कारण है।
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