आगरा। लेप्रोस्कोपी (दूरबीन विधि) से सर्जरी के दौरान कैंसर के अवशेष बाकी नहीं रहते हैं और न ही गाॅल ब्लैडर यानी पित्ताशय आधा रह जाता है। एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस सर्जन्स ऑफ इंडिया (अमासी) की ओर से आयोजित 118वीं अमासी स्किल कोर्स एंड एफमास एग्जामिनेशन के तीसरे दिन विशेषज्ञ चिकित्सकों ने युवा चिकित्सकों के सवालों के जवाब में कही।
युवा चिकित्सकों में लिखित, मौखिक एवं प्रैक्टिकल परीक्षाओं के दाैरान किसी एक अंग विशेष की सर्जरी का विशेषज्ञ बनने की ललक दिखाई दी। शनिवार को कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ। आयोजन के संयोजक गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल सर्जन डॉ. हिमांशु यादव ने कहा कि इस बार अमासी कॉन्फ्रेंस में प्रदेश में अब तक के सर्वाधिक रजिस्ट्रेशन हुए।
प्रशिक्षक चिकित्सकों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उनके मन में चल रही विभिन्न भ्रांतियों को दूर किया। बताया गया कि नई पीढ़ी के चिकित्सकों को हमेशा आधुनिक तकनीकों के बारे में जानते रहना चाहिए। जिससे वह अपने पास आए मरीजों को और बेहतर इलाज दे सकें।
आयोजन में शामिल डॉ. अनुभव गोयल ने कहा कि दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक), हर्निया और गॉल ब्लैडर सर्जरी आधुनिक तकनीक के कारण कम समय लेने वाली, सुरक्षित और मरीजों के लिए अत्यधिक फायदेमंद सर्जरी है। परीक्षा पैनल में डॉ. अभिनव मित्तल, डॉ. अंकुर बंसल, डॉ. अनुभव गोयल, डॉ. सुरेंद्र पाठक, डॉ. समीर रेगे, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. देवाशीष सरकार और करन रावत शामिल रहे।
सर्जरी और गायनिक से जुड़े लगभग 200 चिकित्सकों ने परीक्षा दी। परिणाम 15 दिनों बाद घोषित किए जाएंगे। समापन पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजना बंसल ने चेन्नई से आए चिकित्सक विग्नेश दुराई को सम्मानित किया। समापन समारोह में डॉ. हिमांशु यादव ने कहा कि जुलाई में आगरा में मिनिमल एक्सेस सर्जन्स की एक बड़ी मेडिकल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। जिसमें देश-विदेश के 100 से अधिक सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर प्रतिभाग करेंगे।