फतेहाबाद रोड स्थित हार्मनी रेजीडेंसी निवासी नकुल शर्मा एक होटल में कर्मचारी हैं। उन्होंने पुलिस से शिकायत की। बताया कि पिता राकेश शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक विज्ञापन देखा था। यह नाका साल्यूशन नामक संस्था का था। इसमें विदेशी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश पर मुनाफे की बात कही गई। पिता ने विज्ञापन में दिए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। कॉल रिसीव करने वाले ने खुद को कंपनी का निदेशक सीताराम बताया। उसने अपनी सलाहकार साक्षी जायसवाल से भी बात कराई। उनसे शुरुआत में 8500 रुपये निवेश कराए गए। बाद में एक ऐप दिखाया। इसमें मुनाफा दिखाया। बाद में अधिक मुनाफे का लालच देकर 13 जनवरी को 9 लाख रुपये और ले लिए। जब भी पिता ऐप खोलते थे, उन्हें हर दिन हजारों रुपये का लाभ दिखाया जाता था। अधिक रकम होने पर पिता ने रकम निकालने के लिए बात की। इस पर साक्षी जायसवाल ने क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए 3.66 लाख रुपये जमा करने का दबाव बनाया।
अमित पटेल नाम के व्यक्ति ने बार्कलेज बैंक गारंटी के नाम पर पिता से पांच फरवरी को 3.65 लाख रुपये ले लिए। उनसे कुल 16.17 लाख रुपये ठग लिए। मगर रकम नहीं दी। नौ फरवरी को अचानक पिता राकेश शर्मा की तबीयत बिगड़ गई। उनकी मृत्यु हो गई। बेटा बैंक में खाते चेक करने गया तो उसे रकम निकलने का पता चला। इससे परिजन का अनुमान है कि साइबर ठगों के जाल में फंसकर रकम चली जाने से तनाव में आकर जान गई।
दो बैंक के खातों में जमा हुई रकम
मृतक के बेटे नकुल शर्मा पिता की मौत के बाद खातों की जानकारी लेने बैंक पहुंचे थे। पता चला कि पिता ने 13 जनवरी से 9 फरवरी के बीच अलग-अलग खातों में रकम जमा कराई थी। यह खाते किसके थे? उन्हें नहीं पता था। भारतीय स्टेट बैंक के खाते से साइबर ठगी की रकम बैंक ऑफ महाराष्ट्र और बंधन बैंक के खातों में जमा हुई थी। साइबर ठगी की आशंका पर साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।
आरोपियों की पहचान के लिए लगी टीम
वृद्ध के खाते से कई खातों में रकम जमा कराई गई थी। बाद में वृद्ध की मृत्यु हो गई। सदमे से मृत्यु होने की बात कही जा रही है। जिन खातों में रकम गई, उनकी डिटेल निकाली जा रही है। आरोपियों की पहचान के लिए टीम को लगाया गया है। -आदित्य सिंह, डीसीपी साइबर क्राइम
ठगी के इन तरीकों से रहें सावधान
अपराधी फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से लोगों को क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के लिए लुभाया जाता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुरुआती दौर में कुछ मुनाफा दिखाकर निवेशकों का विश्वास जीता जाता है, बाद में सारा पैसा हड़प लिया जाता है। अक्सर ठग किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या संस्थान के नाम का इस्तेमाल करते हैं।
शिक्षिका की भी गई थी जान
दो साल पहले जगदीशपुरा क्षेत्र की रहने वाली शिक्षिका को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया था। बेटी की गिरफ्तारी का भय दिखाया था। इसके बाद रकम की मांग की गई थी। दहशत में आईं शिक्षिका की हृदयघात से जान चली गई थी।