आगरा। ताजमहल का दीदार करने दक्षिण कोरिया के 10 पर्यटकों का दल सोमवार की सुबह 8:30 बजे पूर्वी गेट पर पहुंचा। उन्होंने प्रवेश द्वार पर टिकट स्कैन कराए। टिकट अवैध बताकर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। टिकट 30 जुलाई के थे लेकिन उस पर 29 प्रिंट कर दिया गया था। बाद में उन्हें दोबारा टिकट खरीदना पड़ा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कर्मचारी कोरिया के पर्यटकों की भाषा नहीं समझ पा रहे थे। कोरियाई पर्यटक अंग्रेजी न समझने के कारण अपनी समस्या नहीं बता सके। एएसआई कर्मचारियों ने जांच के बाद द्विभाषी की मदद ली। तब पता चला कि टिकट 30 जुलाई के हैं, लेकिन एडिटिंग के बाद टिकट पर 29 जुलाई प्रिंट किया गया था। इस पर कोरिया पर्यटकों को ताजमहल देखने के लिए दोबारा 13000 रुपये के टिकट खरीदने पड़े।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के ताजमहल प्रभारी और वरिष्ठ संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी ने बताया कि पर्यटकों को यह बता दिया गया कि वह 30 जुलाई के टिकट का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं, इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। नए टिकट खरीदने के बाद पर्यटक ताज देखने के बाद चले गए। टिकटों की प्रिंटिंग में गड़बड़ी का यह पहला मामला उनके सामने आया है।