वित्तीय वर्ष के समापन पर शुक्रवार देर रात तक कलेक्ट्रेट स्थित कोषागार पर हिसाब-किताब चलता रहा। यहां बिलों का भुगतान लेने और वित्तीय वर्ष में बजट खत्म न होने पर शेष राशि को सरेंडर करने के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की भीड़ लगी रही। सबसे अधिक चिकित्सा विभाग को भुगतान किया गया। इसमें औषधियों के बिलों के अलावा अन्य विभागों के तमाम बिल शामिल थे।
मुख्य कोषाधिकारी शशिभूषण सिंह तोमर के अनुसार, चिकित्सा विभाग को 39 करोड़, 38 करोड़ शिक्षा विभाग, 3.10 करोड़ नगर निगम, 1.38 करोड़ पुलिस, 52 लाख प्रशासन, 38 लाख कृषि, 33 लाख राजस्व, 18 लाख जिला उद्योग आदि के बिलों का भुगतान हुआ। बता दें कि कई विभाग अपना बजट तक खर्च नहीं कर पाए। ऐसे में जिले में तमाम विकास कार्य पूरे नहीं हुए। लोक निर्माण विभाग से लेकर विकास भवन के कई विभागों को अपनी धनराशि सरेंडर करनी पड़ी। अकेले पीडब्ल्यूडी को ही 11 करोड़ से अधिक की धनराशि शासन को लौटनी पड़ी। रात 12 बजे तक कोषागार में हिसाब-किताब चलता रहा।