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Kisan Andolan: फिरोजाबाद में पुलिस अलर्ट, किसान और सपा नेताओं पर नजर

Mon, 14 Dec 2020 12:14 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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सपा नेताओं को किसान यात्रा निकालने से रोकती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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14 दिसंबर को किसानों के आंदोलन को देखते हुए फिरोजाबाद जिले में सतर्कता बढ़ा दी गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी किसानों के साथ आंदोलन में कदमताल का एलान कर दिया है। रविवार को सपा नेताओं द्वारा किसान संदेश यात्रा निकाले जाने की सूचना पर पुलिस उनकी घेराबंदी में जुट गई। सपा नेताओं के आवास पर पुलिस ने सुबह से डेरा डाल दिया। 

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समाजवादी युवजन सभा (सयुस) के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष को गणेश नगर स्थित आवास से निकलने पर रोका गया। लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर मटसेना पहुंच गए। उधर, सपा एमएलसी दिलीप यादव ने दीदामई क्षेत्र में किसानों और मजदूरों के साथ पंचायत की। 


किसान आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की आशंका पर पुलिस की नजर सपा नेताओं पर है। सोमवार किसान संगठनों के आंदोलन में साथ देने का एलान सपा ने किया है। इसके साथ ही सपा नेता प्रतिदिन किसान संदेश यात्रा भी निकाल रहे हैं। रविवार को सुबह ही सयुस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चौधरी संजय यादव के गणेश नगर स्थित आवास पर फोर्स पहुंच गई। 

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कृषि कानून के विरोध में प्रदर्शन

सपा नेता संजय यादव सुबह मार्निंग वॉक के बहाने घर से निकले और जैन नगर होते हुए रानीपुरा पहुंच गए। यहां से पुलिस को चकमा देकर मटसेना गांव में पहुंच गए। यहां से किसान संदेश यात्रा निकालने की तैयारी की गई थी। मटसेना पुलिस ने भी रैली में शामिल होने वाले सपा कार्यकर्ताओं के आवास पर घेराबंदी की। मटसेना में काफी मात्रा फोर्स पहुंच गई। 

सपा नेता समर्थकों के साथ बाइक छोड़ कर पैदल किसान यात्रा लेकर निकले तो पुलिस ने उन्हें रोक किया। सपा कार्यकर्ताओं ने कृषि कानून के विरोध में जमकर नारेबाजी की। इस दौरान सपा नेता नेम सिंह यादव, प्रधान केवी यादव, कमलेश यादव, देवेंद्र गुर्जर, लोहिया वाहिनी के दिलीप सिंह यादव, मोहित शर्मा आदित मौजूद रहे। 

सपा एमएलसी डॉ. दिलीप यादव नई आबादी के क्षेत्र दीदामई में पहुंचे। पुलिस फोर्स सुबह सपा एमएलसी के नगला भाऊ स्थित आवास पर पहुंची लेकिन तब तक वह आवास से निकल गए थे। डॉ. दिलीप ने किसानों और मजदूरों की पंचायत में कहा कि कृषि कानून के विरोध में 14 दिसंबर को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना है। सरकार को कृषि कानून वापस लेना ही पड़ेगा। 
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