आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान ने हिंदी-ईदु मिश्मी अध्येता कोश बनाया है। ईदु मिश्मी भाषा को इसी नाम की जनजाति के लोग बोलते हैं। ये लोग अरुणाचल में चीन और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मिणी भी इसी जनजाति से थीं। महाभारत काल से ही इस जनजाति का महत्व है।
इस कोश को तैयार करने में हिंदी भाषा विशेषज्ञ प्रोफेसर ओकेन लेगो, डॉ. सभापति मिश्र, ईदु मिश्मी विशेषज्ञ डॉ. अनिल मिली, डॉ. तारून मेने, दारगा लोंबो, मुको देले, चमाली मिल्ली, चेबी मिहु, बिम्ता तायु ने सहयोग दिया है।
ईदु मिश्मी जनजाति का ब्रज व द्वारिका से सीधा संबंध है
केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर नंद किशोर पांडेय ने बताया कि हिंदी-ईदु मिश्मी अध्येता कोश इस महत्वपूर्ण जनजाति की भाषा के साथ संस्कृति का संरक्षण करेगा। इस जनजाति का महाभारत काल से सीधा संबंध ब्रज और द्वारिका से है। इस कोश का सांस्कृतिक, एतिहासिक और भाषिक महत्व है। निश्चित रूप से यह हिंदी भाषी क्षेत्र व अरुणांचल के लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।