करहल। नगर की चूना वाली गली में काव्य संध्या का आयोजन हुआ। इसमें कवियों ने काव्य पाठ करके पाकिस्तान पर तंज सके। कवि नन्हें खां की कविता ‘पाक अभी तक भारत मां का शौर्य पराक्रम जान न पाया...’ सुनाकर भारत की शक्ति का वर्णन किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उप जिलाधिकारी रतन वर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने ‘हर बार क्यों उठती हैं अंगुलियां मेरी तरफ, क्या मेरे सिवा शहर में मासूम हैं सारे लोग...’ कविता पढ़ी। कवि रामदत्त पारस ने, ‘जब खिला चमन वीरान हो गया, तब तुम आये तो क्या आए।’ डॉ. पदम सिंह पदम ने ‘उनको है नमन पूर्वजों को प्रणाम जिनके लाड़लों ने किया देश को महान’ कविता पढ़कर खूब तालियां बटोरीं।
कवि प्रेमचंद्र प्रेम ने ‘कुदरत ही जिस देश का झंडा सुबह शाम फहराए’ रचना पढ़ी। गीतकार उदयवीर सिंह ने ‘प्यासों के घर जाकर बरसें ऐसे बादल कम मिलते हैं’ रचना सुनाई। कवि विवेक पांडेय ने ‘लुट चुका है देश अपना, अब तो बचाना चाहिए, भ्रष्ट नेताओं को बंद जेलों में होना चाहिए’ कविता सुनाई।
कवि मेहराम सिंह ने तपोभूमि है ऋषि मुनियों की कविता सुनाई। इस अवसर पर दुर्वेश यादव, रघुवर दयाल, शायर ताहिर चांद, हरिकिशोर वर्मा, पीयूष प्रेम आदि ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर नितिन चतुर्वेदी, ब्रजकिशोर मिश्रा, आकिब, होशियार, समसुद्दीन, रामशंकर, विनय कुमार, चमन, सुशील आदि लोग मौजूद रहे।