पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर रविवार को सूरसदन प्रेक्षागृह में कवि सम्मेलन हुआ। इसका शुभारंभ डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. अरविंद दीक्षित ने किया।
जयपुर से आए कवि अशोक चारण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन करते हुए सुनाया कि ‘तलैया की लहरों को भी उत्ताल बना डाला, साठ मिनट में धन्ना सेठों को कंगाल बना डाला...’। डा. विष्णु सक्सेना ने श्रोताओं को शृंगार रस की कविता से सराबोर किया। उन्होंने सुनाया, ‘जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं, खिंजा का वक्त है फल फूल रहा हूं, हर तरफ आंधियां हैं नफरतों की, मैं फिर भी, दिया हूं प्यार की हिम्मत से जल रहा हूं...’। इसके बाद उन्हें कई बेहतरीन गीत सुनाए।
कवि गजेंद्र सोलंकी ने भी नोटबंदी का समर्थन कुछ इस तरह किया ‘काले धन पर बिजली गिराई मोदी जी कमाल कर दिया, दे दी झटके में कड़वी दवाई ये कैसा धमाल कर दिया...’। मथुरा से आए कवि मनवीर मधुर ने मां भारती के लालों को देश की एकता और अखंडता कायम रखने को कुछ इस तरह आवाज दी, ‘भले स्वयं परिवारों के हित, जीवन भर संघर्ष करो, लेकिन भूल मत जाना तुम भारत मां के बेटे हो...’।
कवि रमेश शर्मा ने ‘चांद की बातें करते हो, धरती पर अपना घर ही नहीं, रोज बनाते ताजमहल, संगमरमर क्या कंकड़ ही नहीं...’ कविता सुनाई। इनके अलावा डा. प्रवीन शुक्ल, तुषा शर्मा ने कविता पाठ किया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सोम ठाकुर ने की। संचालन दीपक खरे ने किया। सांसद रामशंकर कठेरिया, विधायक जगन गर्ग, भाजपा महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, पूर्व विधायक चौधरी उदयभान सिंह, राम प्रताप चौहान, पूरन डाबर, अनिल चौधरी, प्रमोद गुप्ता गांधी, शरद चौहान आदि मौजूद रहे।