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... कि कोई कैदी कैदखाने में मर गया

Tue, 22 Dec 2015 01:56 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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धीरे धीरे राख का ढेर बन गया, फिर कुछ लोगों से सुना कि कोई कैदी कैदखाने में मर गया... वृद्ध कैदी चितरंजन सिंह विदेह की इस कविता को सुन जेल का मैदान तालियों से गूंज उठा। आराधना संस्था द्वारा कैदियों के वैचारिक सुधार व पारस्परिक सद्भाव के लिए सोमवार को सेंट्रल जेल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। अमर उजाला में 26 नवंबर को प्रकाशित खबर ‘मैं कैद हूं तो क्या हुआ मन मेरा आजाद है’ को पढ़ने के बाद संस्था के सदस्यों ने यह पहल की। ओज के  कवि विनीत चौहान, कमलेश शर्मा व कवयित्री पूनम वर्मा ने कविता रचने वाले कैदियों का हौसला बढ़ाया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आलोक सिंह, विशिष्ट अतिथि मुरारी प्रसाद अग्रवाल, राजबहादुर चाहर, चंद्रकांत गुप्ता, शकुन बंसल, मनोज अग्रवाल, गौरव अग्रवाल थे। कवयित्री पूनम वर्मा ने मां शारदे की वंदना गाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कैदी सुरेश चंद ऐलानी ने कौन कहता है कि कातिलों को प्यार नहीं होता, क्या जिंदगी में चमत्कार नहीं होता... बढ़ रहा है देश मेरा आज हर मजमून में, सत्य का सैलाब बहता हिंदुस्तानी खून में... पंक्तियों से सबकी प्रशंसा पाई।  मैं कैद हूं तो क्या हुआ मन मेरा आजाद है, कल्पनाओं के सहारे उड़ रहा आकाश में... दिनेश की पंक्तियों को सुन लोग भावुक हो गए। विनीत चौहान ने दिनेश को माला पहनाकर सम्मानित किया।
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किसी की याद की खुशबू में भीगे केश लाई हूं, दिलों को जोड़ने वाले अमिट उपदेश लाई हूं, कभी कान्हा के होठों पर सदा रहती थी गोकुल में, मैं ब्रज की बांसुरी हूं, प्रेम का संदेश लाई हूं... कवयित्री पूनम वर्मा ने ये सुंदर पंक्तियां प्रस्तुत की।
कार्यक्रम संयोजक व हास्य कवि पवन आगरी ने हास्य व्यंग्य की रचनाएं सुनाईं। उन्होंने कहा कि पहले देश में दूध दही की नदियां बहा करती थीं, आज दूध दही की थैलियों से नदियों का प्रवाह रुक गया है।
कमलेश शर्मा ने अंतिम सफर हो तो तिरंगा साथ हो रचना सुनाई। शक्ति का सुपंथ दिखाने को, भीलनी का मान बढ़ाने को, सामाजिक समरसता भी कायम हो जाए, इसलिए राम शबरी की कुटिया पर आए... कमलेश शर्मा की यह रचना काफी पसंद की गई।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे विनीत चौहान ने निर्भया कांड पर रचना सुनाकर सबको भावुक कर दिया। लो एक परी फिर चली गई वहशी पापी हत्यारों से, वो किरण सूर्य की छली गई खुद अपने चांद सितारों से...। कार्यक्रम की अध्यक्षता जेल अधीक्षक संत लाल यादव ने की। स्वागत उद्बोधन संस्था की महासचिव हृदेश चौधरी ने दिया। जेलर लाल रत्नाकर सिंह ने धन्यवाद व्यक्त किया। उपाध्यक्ष संजय बैजल, अनीता गुप्ता, ज्ञानेश शर्मा, मानवेंद्र मल्होत्रा, गौरव धवन ने अतिथियों का स्वागत किया।
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