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सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग, लोगों ने कहा- उपेक्षा की तो चुनाव में सिखाएंगे सबक

Mon, 18 Mar 2019 07:41 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
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सोरों की हरपदी गंगा - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज जिले के लोग और तीर्थ पुरोहित धार्मिक स्थल सोरों को केंद्रीय तीर्थ स्थलों की सूची में शामिल कराना चाहते हैं। उनका कहना है कि इस बार जो भी उनकी मांग की उपेक्षा करेगा, उस राजनीतिक दल को लोकसभा चुनाव में सबक सिखाएंगे। 

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मतदाता चाहते हैं कि तीर्थ नगरी को उसका हक मिले। तीर्थ नगरी में योग मार्ग पर भारत के प्रमुख संतों व पंथों के आश्रम बने हुए हैं। यहां वर्ष भर संत इन आश्रमों में प्रवास कर सूकर क्षेत्र में तप करते हैं। इस क्षेत्र में तप करने का विशेष महत्व है।

सोरों स्थित वराह मंदिर के सेवायत आचार्य नरेंद्र त्रिगुमायत ने कहा कि पौराणिक नगरी सूकरक्षेत्र पृथ्वी का उत्पत्ति केंद्र है। यहां के धार्मिक महत्व को सरकारें नजरअंदाज करती आई हैं। संत समाज अब इस तीर्थनगरी की और अधिक उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेगा। 

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तुलसी की है जन्मभूमि

लक्ष्मीनारायण मंदिर के सेवायत उमेश चरौरे ने कहा कि सूकर क्षेत्र की धरा पर तुलसीदास जैसी महान विभूति ने जन्म लिया है। रामचरित मानस की रचना करके संपूर्ण विश्व को रामकथा का मर्म समझाया। ऐसी तीर्थ नगरी का समग्र विकास आवश्यक है। 

रघुनाथजी मंदिर के महंत विष्णु रामदास ने कहा कि तीर्थनगरी में पौराणिक काल के मंदिर हैं, जिनका पौराणिक दृष्टि से खासा महत्व है। मंदिरों के रखरखाव व संरक्षण के प्रति सरकारें उदासीन हैं। राजनीति क दलों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

सिद्धपीठ कालिका माता मंदिर के महंत जगदीश गिरि ने कहा कि ब्रज क्षेत्र की तरह ही तीर्थ नगरी का भी विकास परिषद का गठन किया जाए। सूकरक्षेत्र भी ब्रज क्षेत्र में आता है। जिसका विकास कर सरकार को तीर्थ नगरी के साथ न्याय करना चाहिए। 
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