अमांपुर। किसान यूरिया के लिए सहकारी समितियों के चक्कर काट रहे हैं। धान की फसल की पहली सिंचाई के बाद यूरिया की मांग बढ़ गई हैं। सहकारी समितियों से यूरिया न मिलने पर किसानों को मजबूरन दुकानों से खरीदनी पड़ रही है। दुकानदार इसका फायदा उठाकर मनमाने दामों पर 400 से लेकर 500 रुपये तक यूरिया की बोरी बेच रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं।
सहकारी समितियों पर यूरिया का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। धान, बाजरा, मक्का, आलू की फसल की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को यूरिया की काफी समस्या हो रही है। किसान ब्रजपाल सिंह, ओमकार, ओमपाल, किताब सिंह, दिलीप कुमार, मुलायम सिंह, केशवदेव और ग्रीस चंद्र ने बताया कि धान की फसल के लिए यूरिया की आवश्यकता हैं, लेकिन सहकारी समिति पर यूरिया नहीं मिल रही। निजी विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दामों पर यूरिया खाद बेच रहे हैं। यूरिया का सरकारी रेट 266.50 रुपये निर्धारित किया गया है, लेकिन दुकानदार मनमाने दामों पर 400 से 450 रुपये तक यूरिया बेच रहे हैं। इससे किसानों का बजट बिगड़ रहा हैं। भवर सिंह, धर्मवीर, ओमप्रकाश, राहुल, महाराज सिंह, हिमाचल, दिनेश शाक्य, पुष्पेंद्र कुमार ने बताया कि किसान परेशान हैं। महंगे दामों में दुकानों से खाद लेने के लिए मजबूर हैं। किसानों ने उचित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों की बात
-धान की फसल के लिए यूरिया की जरूरत है। सहकारी समिति पर चक्कर लगाए, लेकिन यूरिया नहीं मिली। निजी खाद विक्रेता 400 रुपये तक यूरिया बेच रहे हैं । - किसान बृजपाल सिंह
-निजी खाद विक्रेता मनमाने दामों पर यूरिया की बिक्री कर रहे हैं। यूरिया की इस वक्त सख्त जरूरत है। इससे किसान का बजट बिगड़ रहा है। - भंवर सिंह किसान
वर्जन
यूरिया को निर्धारित मूल्य पर ही बेचना चाहिए। अगर इसकी बिक्री महंगे दामों में हो रही है तो इसकी जांच कराएंगे और कार्रवाई करेंगे। -अवधेश मिश्रा, जिला कृषि अधिकारी