कासगंज के सोरों में कांवड़ लेकर जाते कांवड़िए।
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सोरों। शिवभक्तों को गंगा घाटों से कांवड़ में जल भरकर ले जाने पर प्रशासन ने भले ही रोक लगा रखी हो, लेकिन शिवजी में अटूट आस्था रखने वाले कांवड़िए जोखिम उठाकर गंगा घाटों से जल भरकर जा रहे हैं। बम भोले की जयकार करते हुए राजमार्ग से टोलियां गुजरना शुरु हो गई हैं।
कांवड यात्रा पर रोक के बाद अब कांवड़ियों की बड़ी टोलियां नहीं दिख रही हैं। जबकि पहले कांवड़ियों की बड़ी बड़ी टोलियां लोकगीत गाते हुए निकलती थीं। कोरोना के कारण रोक लगने पर अब चार से पांच श्रद्धालुओं की छोटी टोलियां ही दिख रही हैं। मध्यप्रदेश के शिवपुरी से गंगाजल लेने आए कांवड़िए अनिल कुमार का कहना है कि वह हर वर्ष सावन मास के पहले सोमवार को लहरा घाट से गंगाजल लाकर शिवजी का अभिषेक करते हैं। 26 जुलाई को पहले सोमवार पर अपनी यात्रा पूरी कर भोले का गंगाजल से अभिषेक करेंगे।
कोविड की तीसरी लहर आने के संभावित खतरे को देखते हुए इस बार शासन की ओर से कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। जिसके कारण तीर्थनगरी में कांवड़ मेला भी नहीं लग रहा। लेकिन भगवान शिव में आस्था रखने वाले श्रद्धालु अभी भी घाटों से इतर अन्य स्थानों से कांवड़ भरकर सोमवार को शिव के अभिषेक के लिए कांवड़ ले जा रहे हैं।