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Agra News: गोलमेज सेमिनार में शामिल हुए रियाज़ुल समद

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लंदन एसओएएस यूनिवर्सिटी में गोलमेज सेमिनार के  मुख्य अतिथि भारत के चीफ जस्टिस ऑफ  बीआर गवई के स - फोटो : स्वयं
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पटियाली । लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज यूनिवर्सिटी में भारतीय न्यायपालिका में डिजिटल तकनीकों की भूमिका विषय पर एक गोलमेज सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि भारत के सीजेआई भूषण रामकृष्ण गवई मौजूद रहे।
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इस गोलमेज सेमिनार में पटियाली निवासी ब्रिटेन की विश्वविख्यात कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एमफिल के छात्र रियाज़ुल समद बिन मोहम्मद ने प्रतिभाग किया। यह जानकारी उनके मामा सोशल एक्टिविस्ट शाहिद मलिक ने दी। सेमिनार में सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि भारत की न्यायिक सिस्टम में डिजिटल तकनीक ऐतिहासिक भूमिका निभा रहा है। इससे न केवल अदालतों की कार्यक्षमता बढ़ी है बल्कि आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच भी सुलभ बनी है। विशेष रूप से वंचित और हाशिए पर रह रहे समुदायों के लिए चीफ जस्टिस बीआर गवई ने कहा कि भारत की न्यायिक सिस्टम विश्व की सबसे बड़ी और जटिल व्यवस्थाओं में से एक है। संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विशेष अधिकार देता है। एसओएएस यूनिवर्सिटी के गोलमेज सेमिनार में भारत के सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ आदि उपस्थित रहे।

ई-कोर्ट और वर्चुअल सुनवाई बनी मील का पत्थर
सीजेआई बीआर गवई ने आगे कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में शुरू किया गया ई-कोर्ट प्रोजेक्ट अदालतों की प्रक्रिया को आसान बनाने में मील का पत्थर साबित हुआ। 2020 में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से 5.5 मिलियन से अधिक मामलों की सुनवाई हुई। अब कई अदालतों में हाइब्रिड सुनवाई (ऑनलाइन और ऑफलाइन) एक स्थाई व्यवस्था बन चुकी है। इससे वकीलों और वादियों को देश के किसी भी कोने से अदालत में पेश होने की सुविधा मिली है। इससे न्याय तक पहुंच भी आसान और लोकतांत्रिक बनी है।
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