सोरोंजी। तीर्थनगरी के राम भक्त मनोज मिश्रा जिन्होंने 1990 में राम जन्म भूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। भूमिगत रहते हुए घर-घर संपर्क कर कारसेवक तैयार कर अयोध्या भेजे। उनके पिता छोटेलाल मिश्र ने इस आंदोलन में गिरफ्तारी भी दी। ऐसे राम भक्त मनोज मिश्रा के पास राम दरबार के दो सिक्के एक तांबे का जिस पर वर्ष 1717 अंकित है दूसरा चांदी व गिलट धातु का मिश्रित जिन पर वर्ष 1740 अंकित है। इन सिक्कों पर श्री राम दरबार की छवि अंकित है। तीर्थनगरी के चंदन चौक के रहने वाले साइकिल कारोबारी मनोज मिश्रा का कहना है 1977 में जब वह दस वर्ष के थे तब उनके बाबा रामजी बल्लभ मिश्रा ने उनको यह सिक्के दिए थे। यह सिक्के वह अपने पूजाघर में रखकर नित्य पूजा करते हैं। वर्ष 1717 में तांबे के बने एक आने के सिक्के पर एक तरफ राम दरबार बना हुआ है, दूसरी तरफ ईस्ट इंडिया कंपनी तथा सन 1717 अंकित है।
- मेरी पीड़ा है कि ब्रिटिश काल में भी सिक्कों पर राम राज्य था लेकिन 1947 में देश आजाद होने के बाद भगवान के चित्र मुद्राओं पर से गायब हो गए। अब रामलला की 550 वर्ष बाद अपने घर में प्राण प्रतिष्ठा हो रही है। मोदी सरकार को पुन: प्रचलित मुद्रा पर राम दरबार व अन्य देवी देवताओं के चित्र अंकित कराना चाहिए। - मनोज मिश्रा