कासगंज। पेड़ों के अंधाधुंध कटान और फोरलेन की भेंट चढ़ी हरियाली के कारण सेटेलाइट से गायब हुआ कासगंज का ग्रीनकवर अब वापस लौटने लगा है। वन विभाग द्वारा हरियाली को दिए गए संरक्षण से सफलता मिलने लगी है। पर्यावरण को सबसे अधिक संजीवनी गंगा एवं भागीरथी वन से मिली है।
जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्षों से कवायद चल रही है लेकिन विकास के लिए पेड़ों पर जब आरी चली तो पर्यावरण दूषित हुआ और आंकड़े चौंकाने वाले आए। दो साल पहले फोरलेन के लिए काटे गए पेड़ों के कारण कासगंज जिले की सीमा में एक बड़ा वन क्षेत्र कम हो गया।
फोरलेन के लिए पेड़ काटे जाने से पहले सेटेलाइट पर कासगंज-बरेली मार्ग की हरियाली का एक बड़ा क्षेत्रफल दिखाई देता था, लेकिन पेड़ काटे जाने के बाद पिछले साल दिसंबर माह में जो रिपोर्ट आई। उसमें सेटेलाइट से यह हरियाली क्षेत्र गायब हो गया था। इसको लेकर जिला प्रशासन और वन विभाग चिंतित हुए।
जिले में वर्ष 2019 में स्थापित किया गया गंगावन इस ग्रीन कवर को वापस लाने का सारथी बन गया। वन विभाग को शासन से मिली रिपोर्ट के मुताबिक अब सेटेलाइट पर ग्रीन कवर दिखाई देने लगा है। गंगावन के अलावा भागीरथी वन भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में की जा रही पहल को मजबूती दे रहा है।
फिर भी जारी हैं विभाग के प्रयास
वन विभाग के प्रयास से भले ही ग्रीन कवर सेटेलाइट पर वापस लौट रहा हो, लेकिन विभाग फिर भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रयास जारी रखे हुए है। तभी तो अगले साल 21 लाख पौधेरोपित करने का लक्ष्य तय कर लिया गया है और पौधरोपण के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी गई है।
यह वन क्षेत्र दे रहे अच्छे संकेत
चंदनपुर घटियारी में बना गंगावन, दतलाना में बने भागीरथी वन के अलावा कलक्ट्रेट में बनी वाटिका में पौधे अब वृक्ष बनने लगे हैं तो इन वन क्षेत्रों से सोरों क्षेत्र में गायब हुआ कासगंज का ग्रीनकवर अब वापस लौट रहा है।
तब की स्थिति-
- 100 मीटर चौड़ाई का ग्रीन कवर सेटेलाइट से हुआ था गायब।
- 12.29 प्रतिवर्ग किलोमीटर जिले के वन क्षेत्र में आई थी गिरावट।
- 3000 पेड़ फोरलेन के लिए जिले की सीमा में काटे गए थे।
अब की स्थिति
- 3.51 लाख पौधे भागीरथी वन में हो रहे हैं विकसित।
- 1.21 लाख पौधे गंगावन में वृक्ष बनकर पर्यावरण का कर रहे संरक्षण।
- 21 लाख पौधेे अगले साल जिले में रोपने का लक्ष्य है तय।
वर्जन-
- गंगावन के अलावा अन्य क्षेत्रों में वर्ष 2019 में जो पौधरोपण हुआ था। वे पौधे अब वृक्षों के रूप में विकसित हो रहे हैं। उससे ग्रीनकवर लौटने लगा है। शासन से संतोषजनक रिपोर्ट मिली है। भागीरथी वन भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बेहतर है- दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।