दंगे के तीसरे दिन हालत में सुधार तो आया लेकिन रोडवेज अपनी बसों का संचालन नहीं कर सका। जो बसें पहले दिन रवाना हुई उन्हीं का संचालन एटा डिपो के जरिए किया गया। ऐसे में यात्रियों को दिक्कत हो गई। रेलवे में भी रविवार शाम यात्री बाहर के लिए रवाना हुए।
गणतंत्र दिवस के दिन रोडवेज ने सुबह के समय ही अपनी बसों का संचालन किया। इसके बाद दंगा भड़क जाने से रोडवेज ने अपनी बसों का संचालन बंद कर दिया।
सुबह के समय करीब दो दर्जन बसें जो बाहर चली गई उन्हीं बसों के जरिए तीन दिन शहर की बाहरी सीमा तक बसों का संचालन किया गया। जिससे जिन यात्रियों को बाहर जाना था वो नहीं जा सके। इससे रोडवेज की आय पर भी काफी असर पड़ गया। विभाग को तीन दिन में 25 लाख की चपत लग गई।