मैनपुरी। कन्नौज वह सीट है जहां से अखिलेश पहली बार सांसद बने और करहल से पहली बार विधायक। इस बार वे करहल से विधायक भी हैं और अब कन्नौज के नए सांसद भी। ऐसे में उनका नया ठिकाना कहां होगा इसकी लोगों के बीच चर्चा है। छह माह में उन्हें अपना निर्णय लेकर एक सीट छोड़नी होगी। खाली हुई सीट पर चुनाव आयोग उप चुनाव कराएगा।
पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सियासी पारी कन्नौज से ही शुरू की थी। ये बात वर्ष 2000 की है, जब मुलायम सिंह यादव के सीट छोड़ने के बाद यहां उप चुनाव हुआ था। सपा ने अखिलेश यादव को प्रत्याशी बनाया और वे जीतकर सांसद भी बने। लगातार तीन बार वे यहां से सांसद चुने गए। 2012 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने ये सीट छोड़ दी थी। इसके बाद डिंपल यादव यहां से सांसद रहीं।
वहीं 2022 में जब विधानसभा चुनाव लड़ने की बात आई तो अखिलेश ने करहल को चुनाव। करहल से वे वर्तमान में विधायक हैं और सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं। ये पहली बार था जब अखिलेश ने विधानसभा चुनाव लड़ा।
अब वे कन्नौज से एक बार फिर से सांसद बन गए हैं। अब उन्हें एक सीट छोड़ने का निर्णय करना होगा। ऐसे में वे कन्नौज छोड़ते हैं या करहल इसकी चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। न करहल के मतदाता चाहते हैं कि अखिलेश यादव सीट छोड़े और न कन्नौज के। ऐसे में अखिलेश को ये निर्णय बहुत सोच-समझकर लेना होगा।
सरकार बनी तो दिल्ली जाने की भी हैं चर्चाएं
अखिलेश यादव को लेकर कई तरह की चर्चाएं सियासी गलियों में चल रही हैं। इन चर्चाओं के अनुसार अगर केंद्र में इंडिया गठबंधन की सरकार बनती है तो अखिलेश यादव दिल्ली जाएंगे। ऐसे में वे करहल सीट छोड़ेंगे। वहीं अगर केंद्र में सरकार नहीं बनती है तो वे सदन में नेता प्रतिपक्ष की ही भूमिका निभाएंगे। इसके लिए उन्हें कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा देना होगा।