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महाभारत काल से भी पहले का है भांवत स्थित जखदर महादेव मंदिर

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मैनपुरी। गांव भांवत में स्थित जखदर महादेव का प्राचीन शिवमंदिर महाभारत काल से भी प्राचीन है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण लाखा बंजारा ने महाभारत काल से पहले कराया था। महाभारत काल में यहां पहुंचे पांडवों ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। गांव भांवत निवासी राकेश दुबे बताते हैं कि मंदिर का निर्माण लाखा बंजारे ने कराया था, जो ग्राम भारापुर के निवासी थे। लाखा बंजारे अपने एक लाख बैलों पर खाड़ (चीनी) लेकर जा रहे थे।
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मंदिर के पास शंकर जी एक बाबा के भेष में मिले। उन्होंने बंजारे से चीनी मांगी। बंजारे ने उन्हें चीनी न देने के लिए यह कहकर मना कर दिया कि इसमें नमक है। घर जाकर देखा तो चीनी की जगह सभी नमक ही निकला। यह देखकर परेशान बंजारा अपनी पत्नी सहित शंकर जी के स्थान पर आया और माफी मांगी तो नमक चीनी हो गया।
इसके बाद उसने भव्य मंदिर का निर्माण कराया। तब से लगातार बराबर इस मंदिर से लोग जुड़ते गए। महाभारत युद्ध से पूर्व पांडवों ने भी जखदर महादेव की पूजा अर्चना की और मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार कराया। शंकर जी की शिवलिंग के लिए लोगों की आस्था है कि अगर कोई शर्त लगाकर अपनी भुजाओं में लेना चाहे तो शिवलिंग का आकर अपने आप बढ़ जाता है।
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ये भी है किवदंती
भांवत स्थित जखदर महादेव के प्राचीन शिवमंदिर के बारे में बताया जाता है कि भांवत निवासी एक ठाकुर परिवार गाय पालता था। उनकी गाय घर पर दूध नहीं देती थी और जहां मंदिर बना है वहां पर आकर गाय के थनों से अपने आप दूध की धार निकलने लगती थी। इस समय में मंदिर में शंकर जी की शिवलिंग के अतिरिक्त हनुमान जी, दुर्गा माता की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।
जखदर महादेव मंदिर की मान्यता है कि यहां आने वाले प्रत्येक भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। कोरोना महामारी के बजह से लोग यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं।
रामनरेश मिश्रा
सच्चे मन से जो भी भक्त जखदर महादेव मंदिर पर आकर पूजा अर्चना करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। यह मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत ही शुभकर है।
चतुर्भुज सिंह चौहान
जखदर महादेव मंदिर अति प्राचीन है। मंदिर से लोगों की भावनाएं भी जुड़ी हैं। जब भी कोई शुभ कार्य करता है तो मंदिर में माथा टेकने अवश्य जाता है।
लाखन सिंह भदौरिया
भगवान भोलेनाथ बहुत ही कृपालु हैं। जखदर महादेव मंदिर में आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। लोग मंदिर से अपने को स्वस्थ रखने की आस्था भी रखते हैं।
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वरुण मिश्रा
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