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कारगिल शहीदों के परिजनों से वादा कर भूली सरकार

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कारगिल शहीद सत्यदेव यादव का फाइल फोटो - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। आज कारगिल विजय दिवस है। कारगिल युद्घ में शहीद हुए वीर जवानों को आज हर कोई याद कर रहा है। शहीदों की माताओं और पत्नियों को आज भी सरकार से एक पीड़ा है। कुछ शहीदों के लिए सरकार ने किया वादा पूरा नहीं किया तो कुछ का कहना है कि शहीदों के परिजनों की कोई सुनने वाला नहीं है। कम से कम प्रशासनिक अधिकारी साल में एक दिन तो उनके घर पहुंचकर उनकी समस्या को सुने।
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वीर स्थल पर नहीं पहुंचते अधिकारी
मैनपुरी ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम अंजनी के ग्रेनेडियर सिपाही प्रवीन कुमार ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून 1999 को शहादत पाई थी। उन्होंने अपने साथी मुनीष कुमार के साथ मिलकर कई दुश्मनों को मारने के बाद सीमा की रक्षा करते हुए प्राणों का बलिदान दिया था। गांव में बना स्मारक उनके बलिदान की गवाही देता नजर आता है। शहीद की पत्नी सुमन यादव का कहना है कि सरकार ने सब कुछ दिया लेकिन देश के लिए न्यौछावर होने वालों के परिजनों और उनके वीर स्थल पर एक भी दिन अधिकारी नहीं पहुंचते हैं। कम से कम साल में एक दिन तो अधिकारी उनके वीर स्थल पर पहुंचकर उनके परिजनों का हाल जानें।



सुमन यादव पत्नी कारगिल शहीद प्रवीन कुमार
शहीद अमरुद्दीन की प्रतिमा के लिए नहीं दी जमीन
कारगिल युद्ध के दौरान तीन जुलाई को किशनी को गांव दिवनपुर साहिनी निवासी अमरुद्दीन शहीद हो गए थे। शहीद की पत्नी मोमना बेगम का कहना है कि सरकार ने अन्य शहीदों को जो सुविधाएं दीं उनके परिवार को साथ सौतेला व्यवहार किया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के बाकी शहीदों को सरकारी भूमि के पट्टे दिए गए थे। जबकि उन्होंने कई बार अधिकारियों से इस बारे में बात की पर उन्हें आजतक जमीन का पट्टा नहीं दिया गया। दूसरी पीड़ा शहीद की परिवार को है कि 17 सालों तक तत्कालीन विधायक द्वारा प्रदान की गई प्रतिमा उनके ही गोदाम में धूल फांकती रही। प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी उन्हें जमीन मुहैया नहीं कराई गई। बाद में अपने ही गैस गोदाम के सामने हाईवे के किनारे शहीद की प्रतिमा को खुद की जगह पर स्थापित कराया।
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मोमना बेगम पत्नी कारगिल शहीद अमरुद्दीन
कम से कम साल में एक दिन तो हाल जानने आएं अधिकारी
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए बेवर क्षेत्र के ग्राम गढ़िया घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार तीन जून को शहीद हो गए थे। गांव में बना स्मारक उनकी शहादत की याद दिलाता है। उनकी माता-पिता गांव में रहते हैं। पत्नी मंजू यादव भरथना में रहकर बच्चों को पढ़ा रही हैं। पत्नी मंजू यादव का कहना है कि सरकार ने सबकुछ दिया लेकिन परिजनों को जो सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। परिजनों को यदि कोई सताता है तो चौकी का सिपाही भी उनकी बात को नहीं सुनता है। प्रशासनिक अधिकारियों को साल में कम से कम एक दिन शहीदों के परिवार से मिलने के लिए आना चाहिए।
मंजू यादव पत्नी कारगिल शहीद मुनीष कुमार
शहीद सत्यदेव के माता-पिता से नहीं पूछ रहा कोई हाल
कारगिल चोटी पर पाक सैनिकों के साथ युद्ध में घिरोर क्षेत्र के गांव शाहजहांपुर निवासी सत्यदेव सिंह शहीद हो गए थे। उनके परिवार को सरकार ने सुविधाएं दीं। परिजन भी सरकारी की सुविधाओं से संतुष्ट हैं। शहीद की मां जावित्री देवी का कहना है कि बूढ़े मां-बाप के पास पहले तो बहुत लोग उनका हाल जानने के लिए आते थे। लेकिन अब उनका हाल जानने कोई नहीं पहुंच रहा है। कम से कम कारगिल विजय दिवस पर तो अधिकारी आकर उनका हाल जान लेते।
जावित्री देवी कारगिल शहीद सत्यदेव की मां
शहीद हेमचरन के परिजनों से किया वादा भूली सरकार
औंछा। औंछा क्षेत्र के ग्राम नगला आंध्रा निवासी हेमचरन कारगिल की लड़ाई में 23 जुलाई को शहीद हो गए थे। पत्नी संगीता देवी की सन् 2005 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके एक बेटा व एक बेटी है। बेटा शुभम नोएडा से बीसीए व बेटी शिल्पी यादव ग्रेटर नोएडा से बायोटेक कर रही है। सरकार द्वारा परिजनों से कहा गया था कि शहीद हेमचरन के नाम से गांव में एक कॉलेज खुलवाया जाएगा। कॉलेज के लिए उनके द्वारा जमीन का भी इंतजाम कर लिया गया था। इसकी सूचना उन्होंने कई बार जिला प्रशासन को भी दी थी, लेकिन प्रशासन द्वारा कॉलेज के लिए कोई पहल नहीं की गई।
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रामश्री कारगिल शहीद हेमचरन की मां
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