अभाव में रहकर की पढ़ाई, बना सिपाही
मुठभेड़ में शहीद हुए सिपाही बबलू कुमार ने अभाव में जीवन व्यतीत किया। पर, वे शुरू से ही मेधावी थे और 2018 में पुलिस में भर्ती हो गए। उनके गांव के रहने वाले राकेश ने बताया कि बबलू मिलनसार होने के साथ पढ़ने में भी होशियार था।
दसवीं कक्षा से ही उसने सिपाही बनने की ठान रखी थी। पढ़ाई के साथ सुबह को दौड़ लगाने जाता था। गांव के युवकों के साथ उसने तैयारी की। वह कहता था कि एक दिन गांव का नाम रोशन करूंगा। उसके सिपाही बनने पर पूरे गांव में खुशी मनाई गई थी।
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तहेरा भाई पीएसी में
बबलू के ताऊ का पुत्र जितेंद्र भी उसके बाद पीएसी में भर्ती हुआ है जो इस समय फतेहगढ़ में तैनात है। गांववालों का कहना है कि बबलू बहुत मिलनसार था। वह जब भी छुट्टी आता था, सबसे सम्मान देकर मिलता था। अब सरकार और पुलिस को बदमाशों का खात्मा करना चाहिए। तभी बबलू के बलिदान का बदला पूरा होगा।