ताजमहल के चारों ओर नाले, नदी, कचरे की बदबू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक न पहुंचे, इसके लिए नगर निगम को कई जतन करने पड़े। नाले की बदबू पर मुख्यमंत्री की नाराजगी से बचने को फाइटो रेमेडिएशन, मोगरे की माला, चेन्नई से केमिकल मंगवा कर ट्रीटमेंट कराया गया तो यमुना नदी की ओर से पानी में आ रही दुर्गंध रोकने के लिए पानी में क्लोरीन डाला गया और ताज की दीवार से सटे पार्क की घास में रुई में दबाकर कन्नौज से मंगवाया इत्र भी रखवाया गया। उत्तरी ओर से चल रही हवाओं के कारण रुई के फाहे में इत्र डालकर 24 जगह रखवाया गया ताकि ट्रंप तक दुर्गंध न जाए।
विज्ञापन
2 of 5
नालों के किनारे रखे गए इत्र से भरे कप, लगाए गए मोगरे के फूल
- फोटो : Amar Ujala
ताज पूर्वी गेट नाले के ट्रीटमेंट के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने तीन दिन तक ताज के चारों ओर घूमकर दुर्गंध का इलाज किया। ताज टैनरी की ओर सिल्ट हटवाई गई तो पश्चिमी और उत्तरी दिशा से यमुना के ठहरे हुए पानी से उठती बदबू में क्लोरीन डलवाया गया।
विज्ञापन
3 of 5
ताजमहल परिसर में रखे गमले
- फोटो : Amar Ujala
चूना और केमिकल का छिड़काव दो दिन पहले ही कर दिया गया ताकि केमिकल की दुर्गंध भी न आए। ट्रंप के दौरे से चार घंटे पहले हरे कपड़े और रूई के फाहों में दबाकर कन्नौज से मंगवाया गया विशेष इत्र यमुना किनारे रखवाया गया।
4 of 5
ताजमहल
- फोटो : Amar Ujala
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पत्नी, बेटी और दामाद सहित ताज का दौरा करना पर्यटन उद्यमियों को बड़ी उम्मीद दे गया है। दो साल से सैलानियों की घटती संख्या से परेशान उद्यमियों को लग रहा है कि अब सिर्फ अमेरिका से ही नहीं, अन्य देशों से भी लोग आएंगे। ट्रंप के आने से संदेश गया है कि ताजनगरी में जाना हर लिहाज से सुरक्षित है।
सैलानियों के घटने की दो वजह मुख्य तौर पर मानी जा रही थीं। इनमें सबसे प्रमुख वह डर था जो सीएए पर हुए विरोध प्रदर्शन से पैदा हुआ। इससे पहले राम मंदिर का फैसला आने और अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई। दूसरा, आगरा की आब ओ हवा को सैलानियों के लिए खराब बताया जा रहा था। पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि अब यह संदेश जाएगा कि जहां ट्रंप परिवार सहित जाएं, वहां जाने में भला क्या खतरा हो सकता है।