आगरा के सिकंदरा स्मारक में 124 एकड़ में फैले मुगल शहंशाह अकबर के मकबरे के चारबाग में लगे कल्पवृक्ष के साथ पर्यटक सेल्फी ले सकेंगे। स्मारक के मुख्य प्रवेश द्वार के दायीं ओर लगे कल्पवृक्ष को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सेल्फी पॉइंट के रूप में विकसित करने वाला है। यहां तक पहुंच मार्ग और कल्पवृक्ष का ब्योरा देने वाला बोर्ड लगाया जाएगा।
मुगलिया दौर के स्मारक में कल्पवृक्ष का दुर्लभ पेड़ है। तना 20 फीट से ज्यादा व्यास का है। सिकंदरा स्मारक आने वाले सैलानियों को यह पेड़ आकर्षित करता रहा है, लेकिन इसका नाम और इसके बारे में एएसआई की ओर से कोई जानकारी नहीं थी।
अब एएसआई आगरा सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद डाॅ. राजकुमार पटेल ने कल्पवृक्ष को आकर्षण का केंद्र बनाने की योजना बनाई है। डाॅ. पटेल ने बताया कि बाग में मौजूद प्राचीन कल्पवृक्ष के साथ पर्यटक सेल्फी ले सकेंगे। इसके लिए गेट के पास ही एक पॉइंट तैयार किया जा रहा है।
सेंटर में देंगे पौधों की जानकारी
पुरातत्वविद ने बताया कि इंटरप्रिटेशन सेंटर में सिकंदरा स्मारक में लगे पेड़-पौधों की जानकारी भी दी जाएगी। सेंटर के एक ब्लॉक में यहां लगे दुर्लभ प्रजाति के पौधों का ब्योरा दिया जाएगा। पेड़ पर भी बोर्ड लगाएंगे ताकि स्मारक के साथ पर्यटक मुगलिया दौर के पर्यावरण को भी समझ सकें। पौराणिक कथाओं में कल्पवृक्ष को लेकर कई मान्यताएं हैं। डाॅ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आरके अग्निहोत्री ने बताया कि ब्रज में कल्पवृक्ष की संख्या बेहद कम है। यह अंगुलियों पर गिनने लायक ही बचे हैं। आगरा के वातावरण में यह पनप नहीं पाए, लेकिन इन्हें अब कई जगह लगाया जा रहा है।
वैज्ञानिक नाम- अदनसोनिया डिजिटाटा
उपयोग- औषधीय गुणों की भरमार
इनमें फायदेमंद- किडनी रोग, ब्लेडर, अस्थमा, डायरिया, मलेरिया, माइक्रोबियल इन्फेक्शन
पौराणिक मान्यता- कल्पवृक्ष के नीचे बैठकर जो इच्छा की जाए, वह पूर्ण होती है। समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से एक।