जैतपुर के करनपुरी गांव के तालाब में बड़ी संख्या में कछुए मरे मिलने की खबर से हड़कंप मच गया है। अभी भी कछुओं के मरने का सिलसिला जारी है। यहां दुर्गंध के कारण गांव के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। बीमारी फैलने की आशंका से ग्रामीण परेशान हैं। तहसील, विकास और वन विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर तालाब के पानी और मिट्टी का नमूना लिया है।
संकट में पहुंची कछुओं की आठ प्रजातियाें का चंबल नदी में संरक्षण हो रहा है। ऐसे में जैतपुर के करनपुरी गांव के तालाब में पानी जहरीला होने से बड़ी संख्या में कछए मरने से हड़कंप मच गया है। ग्रामीण विजय चौधरी, भंवर सिंह, राम सनेही, संतोषीलाल, चंद्र प्रकाश, नाहर सिंह, जागेश्वर आदि ने बताया कि चार दिन से कछुए मर रहे हैं। सूचना के बाद भी वन विभाग की टीम ने इन्हें बचाने का कोई इंतजाम नहीं किया। अब दुर्गंध आने से यहां रहना मुश्किल हो गया है। बीमारी फैलने की आशंका के चलते ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। तब मंगलवार शाम को वन विभाग, राजस्व और विकास विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर तालाब से शव निकालने और पानी निकालने की कार्रवाई शुरू की। अब तक कछुओं के 72 शव मिले हैं।
कछुआ प्रजनन केंद्र दड़ाहता के ललित कुमार ने तालाब के पानी और मिट्टी का नमूना लिया। उन्होंने बताया कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। एसडीएम उमाशंकर ने बीडीओ को तालाब का पानी निकलवाने और रेंजर को जीवित कछुओं को नदी तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। समाचार लिखे जाने तक वन विभाग के ब्रजेश परमार, सुरेन्द्र सिंह भदौरिया, महावीर सिंह, सज्जन सिंह, होतम सिंह, राजस्व और विकास विभाग की टीम काम में लगी हुई थी। जैतपुर के रेंजर सत्यपाल सिंह ने बताया कि कछुओं के शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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सिंथेटिक दूध का केमिकल युक्त पानी हो सकता है कारण
बाह। करनपुरी में कछुए मरने के मामले में वन विभाग की प्रारंभिक जांच में तालाब का पानी जहरीला होने के पीछे सिंथेटिक दूध का धंधा हो सकता है। वन दरोगा ब्रजेश परमार ने बताया कि गांव में सिंथेटिक दूध का धंधा होता है। धंधा करने वाले केमिकल युक्त पानी तालाब में बहाते हैं। इससे पानी जहरीला हो सकता है। पानी के नमूने की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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कछुओं के संरक्षण में लापरवाही उजागर
बाह। जहां चंबल सेंक्च्युरी में दुर्लभ और लुप्त प्राय स्थिति में पहुंचे कछुओं का संरक्षण हो रहा है। वहीं, अन्य नदी और तालाबों में अनदेखी उजागर हुई है। चंबल में कछुओं की नेस्टिंग हेचिंग तक निगरानी होती है। तालाब में मर रहे कछुओं की सूचना पर वन विभाग की टीम चार दिन बाद गांव पहुंचने को लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।