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पांच दिन तक बस पानी पर ही जिंदा रही जूली

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28एमएनपी-33-छात्रा जूली - फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। थाने में लायी गयी बच्ची पिता और चाचा की बेरहमी बयां करती रही, लेकिन पुलिस इस मामले में पूरी तरह संवेदनहीन बनी रही। अपनी जिम्मेदारी खत्म करने के चक्कर में स्थानीय पुलिस ने इस मामले में न तो कोई लिखा पढ़ी की और न ही बच्ची को कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना उचित समझा। सुपुर्दगी भी उसी पिता को दे दी, जिसके डर से बच्ची घर से भाग गयी थी।
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गांव नगला दीपा गांव की बच्ची पिता की मार के डर से जूली पांच दिन तक खेत में छिपी रही। जूली पांच दिन तक बस पानी पर ही जिंदा रही । बच्ची का मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा बना हुआ है। बच्ची के रिश्ते में दादा ने बच्ची के पिता के खिलाफ बच्ची को जान से मारने के प्रयास में पुलिस को तहरीर भी सौंपी, लेकिन पुलिस ने समझा बुझाकर तहरीर को वापस करा दिया।
गुमशुदगी भी किसी ने दर्ज नहीं करायी
बच्ची पांच दिन से गुमशुदा थी, लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य ने पुलिस से संपर्क नहीं किया। पुलिस ने रिश्ते के बाबा हाकिम सिंह व पिता नेमदार की सुपुर्दगी में बच्ची को दे दिया। हिदायत दी कि अगर दोबारा मारपीट की तो सख्त कार्रवाई होगी। छात्रा ने पुलिस को बताया कि कूप के पास ही हैंडपंप लगा है। प्यास लगने पर लोगों की नजर बचाकर वह नल से पानी पी लेती थी। हालांकि इन पांच दिनों में उसने कुछ भी नहीं खाया। खाना न खाने की वजह से बच्ची शारीरिक रूप से कमजोर हो गई है।
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नहीं हुई कोई लिखा पढ़ी
बच्ची ने पिता पर शराब पीकर मारपीट करने का आरोप लगाया है। पिता और अन्य परिजनों को थाने बुलाकर हिदायत दी गई है। बच्ची के साथ दोबारा मारपीट हुई तो आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बच्ची के मामले में फिलहाल कोई लिखा पढ़ी नहीं की गयी है। परिवार की तरफ से भी कोई गुमशुदगी दर्ज नहीं करायी गयी थी।
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- पहुप सिंह, थानाध्यक्ष भोगांव।
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