एटा। शहर के शिकोहाबाद रोड पर भी झोलाछापों की बड़ी संख्या में दुकानें खुली हैं। छोटी मोटी बीमारियों को रुटीन की दवा देने के अलावा यह बड़ी मछली का इंतजार करते हैं। जरा सी दिक्कत होने पर गंभीर बता कर आगरा-अलीगढ़ के बड़े अस्पतालों में रेफर कर देते हैं। जहां से उन्हें मोटा कमीशन भी मिलता है।
शिकोहाबाद रोड में दर्जन भर झोलाछाप अपनी दुकानें सजाए बैठे हैं। इनके यहां मरीजों को ड्रिप लगाई जा रही है तो कहीं चारपाईयों पर मरीज लेटे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इन झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा है। कहीं अपंजीकृत क्लीनिक खोलकर मरीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो कहीं झोलाछाप अपनी जेब गरम कर रहे हैं। शिकोहाबाद रोड पर सबसे ज्यादा बुरा हाल शहर में देखने को मिल रहा है। यहां बंगाली डाक्टर एलोपैथिक दवाएं देकर मरीजों की जिंदगियों से खिलवाड़ करने में जुटा हुआ है तो झोलाछाप तमाम तरह की दवाएं देकर बीमारों का इलाज करने में लगे हुए हैं।
डिलीवरी का बड़ा काम
शहर के क्लीनिकों में गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के नाम पर बड़ा खेल हो रहा है। यहां आसपास के जिलों से भी लोग आते हैं। इसमें अस्पतालों की आशा और नर्सों का बड़ा हाथ होता है। वह प्राईवेट अस्पताल बता कर सुरक्षित डिलीवरी का भरोसा देकर इन अपंजीकृत नर्सिंग होम में महिलाओं को भर्ती करा देतीं है।
भ्रूण लिंग जांच का केंद्र बना एटा
आसपास के जिलों में सख्ती के चलते भ्रूण लिंग पर लगाम लगी तो एटा इसका केंद्र बन गया। आगरा, अलीगढ़, हाथरस व अन्य जिलों के लोग भी यहां आकर भ्रूण लिंग की जांच कराते हैं। शहर सहित जनपद के कई हिस्सों में यह कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। विभाग के जिम्मेदार अपनी कार्रवाई करते हैं लेकिन विभाग के ही कुछ लोग छापा या कार्रवाई होने से पहले इन केंद्रों के संचालकों तक सूचना पहुंचा देते हैं, जिससे वह सतर्क हो जाते हैं।
सीएमओ डा. अजय अग्रवाल से दो टूक
प्रश्न - पिछले साल जिन झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था वह किस नियम और धाराओं में किए गए।
उत्तर - किसी भी तरह की डिग्री नहीं होने वालों के खिलाफ 419, 420 और मेडिकल काउंसलिंग एक्ट 15(3) की धारा 468 के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाता है। जबकि डिग्री के अलावा अन्य पद्धति में उपचार करने पर धारा 467 और 471 के दर्ज एफआईआर दर्ज की जाती है।
प्रश्न - मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद क्या कार्रवाई की गई।
उत्तर - स्वास्थ्य विभाग एफआईआर दर्ज करा सकता है, शेष कार्रवाई पुलिस को करनी होती है।
प्रश्न - झोलाछाप लोगों की जान से खेल रहे हैं ऐसे में नोटिस तक ही कार्रवाई सीमित क्यों?
उत्तर - झोलाछापों को नोटिस दस्तावेज दिखाने के लिए दिया जाता है, अगर दस्तावेज नहीं दिखाए जाते हैं तो पुलिस कार्रवाई विभाग की ओर से की जाती है।
प्रश्न - झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नोडल क्यों, समिति क्यों नहीं?
उत्तर - स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों की कमी है, ऐसी स्थिति में अगर समिति बनाई जाती है तो अधिकारियों की कमी आड़े आती है। ऐसे में नोडल अधिकारी को ही कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दे दी जाती है।
प्रश्न - हाईकोर्ट से जमानत कराने का प्रावधान है लेकिन पुलिस कैसे छोड़ देती है?
उत्तर - यह न्यायिक प्रक्रिया है, एफआईआर के बाद पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय कार्रवाई करता है। जमानत कहां से ली जाती है उस विषय पर मै कुछ नहीं कर सकता।
प्रश्न- डिग्री से अन्य पद्धति के तहत कार्य करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई क्यों नहीं?
उत्तर - नोटिस दिए जाते हैं, सभी को जेल पहुंचाने के लिए नहीं सुधारात्मक प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। ताकि लोग कानून का पालन कर सकें।