जवाहर बाग पर कब्जा करने वाले रामवृक्ष यादव के सात साथियों को गैंगस्टर कोर्ट ने बरी कर दिया है। सभी पर आरोप था कि उन्होंने तहसील में घुसकर मारपीट की थी। इस संबंध में थाना सदर पुलिस द्वारा उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी। इनमें से पांच आरोपी जेल में और दो आरोपी जमानत पर थे।
जवाहर बाग पर कब्जे के दौरान कब्जाधारियों ने 4 अप्रैल 2016 को सदर तहसील में घुसकर मारपीट की थी। तब सदर पुलिस ने सात कब्जाधारी प्रेमपाल पुत्र जानकी प्रसाद निवासी शेखा नवादा थाना बारादरी बरेली, रामायण पुत्र रामलखन निवासी बजारी थाना महोली जिला सीधी मध्य प्रदेश, राजेश पुत्र झब्बूलाल निवासी अर्जुनपुर थाना मेरापुरा जिला फर्रुखाबाद, चरन सिंह पुत्र रामबख्स निवासी बन्दराहा थाना रसूलाबाद कानपुर देहात, प्रिंस पुत्र रामसिंह निवासी मेरिडा थाना कोतवाली बिजनौर, नवल किशोर मौर्य पुत्र बोलाराम मौर्य निवासी हथौड़ा थाना रोजा शाहजहांपुर व राहुल पुत्र किशन लाल निवासी भइयापुर थाना पहासू जिला बुलंदशहर के खिलाफ तहसील में घुसकर मारपीट करने के दो मुकदमे दर्ज किए थे।
पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा था। इसके बाद पुलिस ने मारपीट के सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी की। नवल किशोर और रामायण को अदालत से जमानत मिल चुकी थी। इनमें से राहुल को प्रशासनिक आधार पर पीलीभीत जेल भेज दिया गया था, जबकि चार आरोपी जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
आरोपियों के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि तहसील में हुई मारपीट के मामले में आरोपियों को अदालत पूर्व में बरी कर चुकी है। गैंगस्टर की कार्रवाई की सुनवाई गैंगस्टर कोर्ट में चल रही थी। मंगलवार को गैंगस्टर कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाते हुए प्रेमपाल, रामायण, राजेश, चरन सिंह, प्रिंस, नवल किशोर मौर्य व राहुल को बरी कर दिया है। तहसील मारपीट प्रकरण में नवल किशोर और रामायण जमानत पर थे।