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Janmashtami 2024: कान्हा को यमुना पार कराते समय इस घाट पर हुई थी अद्भुत लीला, कोइला घाट...ऐसे पड़ा नाम

Mon, 26 Aug 2024 12:57 PM IST
धीरेन्द्र सिंह शशिकांत उपाध्याय, टाउनशिप

सार

कोइले घाट जहां पर यमुनाजी ने कान्हा के चरण स्पर्श किए थे। इस घाट का कहानी बेहद ही रौचक है। वासुदेव जब कान्हा को यमुना पार करा रहे थे, तो पानी के उफान से वे डर गए। उसी समय उनके द्वारा बोले गए शब्दों पर इस घाट का नाम कोइला घाट पड़ गया। 
 
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यमुना
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विस्तार
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द्वापर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी अर्थात श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन जब जग के पालनहार का अवतरण हुआ तो कंस के भय से वासुदेव उन्हें छोड़ने के लिए नंदबाबा के घर गोकुल जा रहे थे। तब यमुना नदी पार करते समय नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। यह देखकर वासुदेव को यह लगा कि वह अब बच नहीं पाएंगे। ऐसे में वह भयभीत होकर पुकारने लगे कोई-ले, कोई-ले अर्थात कोई भगवान श्रीकृष्ण को ले ले। इसी कारण इस घाट का नाम कोईले घाट पड़ा।
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गांव कोयला अलीपुर स्थित यह घाट 5000 साल पुरानी भगवान श्रीकृष्ण की लीला का आज भी साक्षी है। मान्यता है कि द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण का कंस के कारागार में जन्म हुआ तो सभी पहरेदार सो गए। इसके बाद वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को टोकरी (छाज) में रखकर यमुना पार गोकुल नंदबाबा के घर छोड़ने के लिए निकले। उस समय यमुना पूरे उफान पर थी। इसके बाद भी वासुदेवजी यमुना में उतर गए। इधर, यमुना जी प्रभु के चरणों को स्पर्श करने के लिए मचल रहीं थीं। पानी का स्तर बढ़ा तो वासुदेव घबरा गए और आवाज लगाई कोई ले कोई ले। इसी बीच श्री कृष्णा अपने चरण टोकरी से नीचे लटका दिए और यमुना स्पर्श करके उतर गईं। 
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