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लड़कियों को शोहदों से बचाएंगी ये ‘परियां’

Thu, 22 Jan 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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‘जुल्म’ तो कई हैं मगर घर से निकलने पर लड़कियां सबसे ज्यादा छेड़खानी का शिकार होती हैं। स्कूल-कालेज, कोचिंग जाते-आते तो कई बार यह रोज का सिलसिला भी बन जाता है। कम ही इसके खिलाफ आवाज उठा पाती हैं। ज्यादातर डरी-सहमी चुपचाप सहती रहती हैं। लेकिन जल्दी ही उन्हें बचाने के लिए ‘परियां’ प्रकट होंगी। इनके हाथ में जादू की छड़ी नहीं मोबाइल होगा। और उसे घुमाते ही शोहदों को वो सबक मिलेगा कि वे छेड़खानी भूल जाएंगे। ऐसा ही महिला उत्पीड़न के अन्य मामले में भी संभव होगा।
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यह सब होगा महिलाओं की मदद के लिए बनी वीमेन हेल्प लाइन 1090 की नई कवायद से। इसके सुरक्षा अभियान को और प्रभावी बनाने केलिए ‘1090 पॉवर एंजिल टीम’ का गठन किया जा रहा है। 11वीं और उससे ऊपर की किसी भी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा ‘पॉवर एंजिल’ बन सकती है। प्रदेश भर में ऐसी एक लाख और आगरा में एक हजार ‘पॉवर एंजिल’ बनाने का लक्ष्य है। चयनित छात्राओं को प्रशिक्षण के बाद विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) का दर्जा और पहचान पत्र भी मिलेगा। ये 1090 का चेहरा बनकर महिलाओं और लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए काम करेंगी। उन्हें उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित भी करेंगी। पीडित इनकी मदद से न्याय और सुरक्षा पा सकेंगी।
आईजी वीमेन पावर नवनीत सिकेरा ने फोन पर बताया कि कोशिश हर स्कूल-कॉलेज के हर सेक्शन से कम से कम दो पॉवर एंजिल बनाने की है। इससे स्कूल-कालेज स्तर पर किसी भी शिकायत पर छात्राएं इनकी मदद ले सकेंगी। इनकी सुरक्षा का भी विशेष ख्याल रखा जाएगा।
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एंजिल बनने के लिए ऐसे करें आवेदन
इसके तीन स्टेप हैं। 1090upnic.in पर जाएं। अपना शहर और कालेज चुनें। फिर अपना नाम, पता, फोटो और कांटेक्ट नंबर, अभिभावक और स्कूल के प्रिंसिपल का फोन नंबर भरें। ये नंबर अनिवार्य हैं। तीसरे स्टेप में अपना इमरजेंसी कांटेक्ट नंबर भरें। डिटेल की जांच और अभिभावकों की सहमति के बाद आप एंजिल बनाई जाएंगी। आगरा जोन से अब तक करीब 60 आवेदन मिल चुके हैं।

श्रेष्ठ परी की फोटो 1090 साइट पर लगेगी
हर आवेदक को एक यूनिक आईडी दी जाती है। सत्यापन के बाद उन्हें पॉवर एंजेल का कार्ड दिया जाएगा। वर्ष भर अच्छा काम करने वाली पावर एंजिल न केवल पुरस्कृत होंगी बल्कि 1090 की वेवसाइट पर उनका फोटो भी लगाया जाएगा। किसी की भी परेशानी की इनके जरिए मिली सूचना पर पुलिस त्वरित कार्रवाई करेगी। यह कार्य स्वैच्छिक है इसलिए एसपीओ को भत्ता या मानदेय नहीं मिलेगा।
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फैक्ट फाइल
88 प्रतिशत महिलाएं मानती हैं छेड़खानी सबसे बड़ी परेशानी
78 फीसदी महिलाएं मानती हैं रात में सफर करना असुरक्षित
30 फीसदी दिन में भी अकेले सफर करना सुरक्षित नहीं पातीं
53 प्रतिशत सुरक्षा के लिए पुलिस को भरोसमंद नहीं मानतीं
(स्रोत : महिला सुरक्षा विषय पर आगरा शहर में अमर उजाला के लिए हंसा रिसर्च द्वारा किया गया सर्वे)
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