कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि राजनीति में संतों का आना उचित नहीं है।कथावाचक प्रेमभूषण सोमवार को सुदिति ग्लोबल एकेडमी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।कथावाचक ने कहा कि रामकथा मानव को मर्यादा याद दिलाती है।उम्र से पहले बढ़ी हुई कल्पना शक्ति बच्चों को गलत दिशा में ले जा रही है।
कथावाचक प्रेमभूषण महाराज ने कहा कि राजनीति में संतों का आना उचित नहीं है। संतों को धर्म का प्रचार प्रसार करना चाहिए। राजनीति ने ही जातिवाद और संप्रदायवाद को बढ़ाया है। एक पंथ से दूसरे पंथ पर जाना ही तो विकार है। संतों को समाज में धर्म को बढ़ावा देने का काम करना चाहिए। कथावाचक प्रेमभूषण सोमवार को सुदिति ग्लोबल एकेडमी में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
कथावाचक ने कहा कि रामकथा मानव को मर्यादा याद दिलाती है। नैतिक शिक्षा का केंद्र विद्यालय नहीं परिवार है। बच्चे को परिवार में ही संस्कार दिए जाने चाहिए। सड़क अवरोध लगाने के लिए नहीं है। सड़क पर धार्मिक आयोजन नहीं होने चाहिए। भारत में महापुरुषों का इतिहास बच्चों को बताना चाहिए। अब संस्कारहीनता को ही विकास माना जाने लगा है।
कथावाचक ने कहा कि पुरोहित के संकल्प और राजा के मन को कोई नहीं जान सकता है। मानव आज विकास तो चाहता है लेकिन अपना हित पहले देखता है। समाज में संवाद करें लेकिन विवाद नहीं। मोबाइल फोन के चलते आज बच्चे अवस्था से पहले बड़े हो रहे हैं। उम्र से पहले बढ़ी हुई कल्पना शक्ति बच्चों को गलत दिशा में ले जा रही है। सरकार द्वारा ट्रैक्टर ट्राली पर बैठने पर लगाए प्रतिबंध पर बोले कि व्यवस्था न देकर अवरोध बनने पर उत्पात होगा। गांव में तो ट्रैक्टर ही साधन है। व्यवस्था के लिए विकल्प खोजा जाना चाहिए। इस मौकेे पर डॉक्टर राममोहन, डॉक्टर कुसुम मोहन, लव मोहन मौजूद रहे।