बिछवां। कस्बा के गांव धनमऊ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का वृतांत सुनाया गया। कथावाचक आचार्य सिंधु कुमार द्विवेदी मृदुल ने सुदामा चरित का वर्णन किया। कहा कि अगर मित्रता की परख करनी है, तो हमें भगवान कृष्ण और सुदामा से सीख लेनी चाहिए। सच्चा मित्र वही है जो कठिन से कठिन समय में भी अपने मित्र का साथ न छोड़े। महाभारत में दुर्योधन और कर्ण की मित्रता भी एक मिसाल है। भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता भी एक उदाहरण है। अंतिम दिन की कथा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।