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भाई को धक्का देकर खुद मौत के आगोश में आया

Mon, 06 Mar 2017 12:49 AM IST
भाई को धक्का देकर खुद मौत के आगोश में आया
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भाई को धक्का देकर खुद मौत के आगोश में आया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ट्रांसपोर्ट नगर पर आईएसबीटी के पास कंटेनर की चपेट में आए बदायूं के विजयपाल ने धक्का देकर अपने भाई की जान बचा ली। हाईवे पार करने से पहले उसने भाई को रोक दिया। कंटेनर को अपनी तरफ आता देखकर भाई को धक्का दे दिया। भाई तो बच गया लेकिन विजयपाल की मौत हो गई।
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बदायूं निवासी छोटा उर्फ विजयपाल ट्रांसपोर्ट नगर स्थित जेके टायर कंपनी में मजदूरी करता था। वह अपने भाई अचेंद्र के साथ गैलाना में रहता था। उनकी शादी नहीं हुई थी। दोनों भाई रविवार सुबह साइकिल से सर्विस रोड होते हुए काम पर जा रहे थे। अचेंद्र ने बताया कि सर्विस रोड से दोनों साइकिल उठाकर हाईवे पार करने लगे। तभी विजयपाल ने अचेंद्र से थोड़ी देर रुकने के लिए कहा। बोले कि, पहले वह देख लें तभी आगे बढ़ना। इसके बाद जैसे ही विजयपाल आगे की ओर बढ़ा कंटेनर आ गया। विजयपाल ने भाई को धक्का मार दिया, जिससे अचेंद्र तो सर्विस रोड पर जा गिरा, जबकि विजयपाल साइकिल सहित कंटेनर की चपेट में आ गया। भाई की मौत से अचेंद्र का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की जानकारी पर परिवार के लोग पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंच गए। 

डाक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन करना चाहता था अनूप 
आगरा। इरादतनगर क्षेत्र का अनूप पुत्र हरीशंकर भी इस हादसे की भेंट चढ़ गया। वह तीन भाइयों में सबसे छोटा था। मां की मौत के बाद बड़े भाइयों ने ही उसकी जिम्मेदारी अपने सिर पर उठा रखी थी। 
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परिवारीजनों ने बताया कि हरीशंकर निवासी नगला बाटम, इरादतनगर किसान हैं। उनके तीन बेटे नीरज, धीरज, अनूप और दो बेटी थीं। अनूप ने गांव के ही एक स्कूल से 95 प्रतिशत अंकों से इंटरमीडिएट किया था। वह डाक्टर बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन करना चाहता था। गत वर्ष उसने मेडिकल परीक्षा पास कर ली थी लेकिन बीडीएस में नंबर आया। इस कारण प्रवेश नहीं लिया। वह एमबीबीएस में प्रवेश चाहता था। उसके भाई नीरज ने बताया कि अनूप ने प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए सिकंदरा क्षेत्र स्थित एक कोचिंग सेंटर में प्रवेश लिया था। वह कोचिंग के पास ही किराए पर कमरा लेकर रहता था। रविवार सुबह कमरे का किराया लेने के लिए घर आ रहा था। आटो से भगवान टाकीज के लिए बैठा था। तभी हादसा हो गया। नीरज ने बताया कि अनूप जब डेढ़ साल का था, तब मां बेबी की भी सड़क हादसे में मौत हो गई थी। अनूप को दोनों भाइयों ने मां की कमी महसूस नहीं होने दी। उसको पढ़ाकर डाक्टर बनाना चाहते थे। हादसे की जानकारी पर पोस्टमार्टम हाउस आए नीरज और धीरज का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।  

कपड़ा कारोबारी को आटो में बैठाकर गया था बेटा
महर्षि पुरम निवासी सतीश चंद्र गुप्ता का रोशन मोहल्ला में कपड़े का कारोबार है। उनकी मौत की खबर पर परिवारीजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। बेटे हनीष और आशीष आ गए। उन्होंने बताया कि आशीष ने पिता को आटो में बैठाया था। उनकी मौत की खबर पर बड़ी संख्या में कपड़ा व्यापारी सहित परिवार के अन्य लोग आ गए। आशीष ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि जिस आटो में पिता को बैठाया वही उनकी मौत का कारण बनेगा।
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