एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने चार्ज लेने से पहले सिविल यूनीफार्म में शहर का चक्कर लगाकर ट्रैफिक व्यवस्था का जायजा लिया तो प्रतिबंधित क्षेत्र में बसें चलती मिलीं।
उन्होंने तुरंत सीओ ट्रैफिक को बुलाकर जांच के आदेश दिए। पुलिस ने दोनों बसें कब्जे में ले लीं। एसएसपी ने पहली प्राथमिकता भी ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार करने की बताई।
2007 बैच के आईपीएस जोगेंद्र सिंह आगरा से पहले बरेली, प्रयागराज, वाराणसी समेत कई जिलों में कप्तान रह चुके हैं। सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद प्रेस से वार्ता में उन्होंने बताया कि एमजी रोड पर डीएम ऑफिस के पास नो एंट्री के समय में बसें चलती मिलीं। सीओ ट्रैफिक को जांच दी गई है। जिसकी भी बसें हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया कि अगर कोई पुलिसकर्मी रिश्वत लेते, वसूली करते पाया जाता है, उसका वीडियो मिलता है या जांच कराने पर ऐसी शिकायत सही मिलती है, तो वह उसे सिर्फ निलंबित नहीं करेंगे, केस दर्ज कराकर जेल भेज देंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि निलंबन कोई दंड नहीं होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पुलिस नहीं, अन्य महकमों की भ्रष्टाचार की शिकायतें आती हैं, तो उन पर भी कार्रवाई कराएंगे।
एसएसपी ने कहा कि थाने में आने वाले लोगों के साथ ठीक से व्यवहार हो, इसकी निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएंगे। जहां पहले से कैमरे हैं, उन्हें 24 घंटे में ठीक कराया जाएगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इंस्पेक्टर पर कार्रवाई होगी। सात दिन की रिकार्डिंग करनी होगी। कैमरे वहां लगाने होंगे, जहां जनसमस्याओं की सुनवाई की जाती है।
एसएसपी जोगेंद्र सिंह ने पहली मीटिंग में ही संकेत दे दिए कि वह थाने और सर्किल में बदलाव करेंगे। जो सीओ और इंस्पेक्टर उनके मानक पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें हटा देंगे।
उन्होंने सीओ से इंस्पेक्टर की और एएसपी से सीओ की रिपोर्ट मांगी है। इनके बारे में एलआईयू से अलग रिपोर्ट मांगी है कि ये अधिकारी ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।