इंटरप्रिटेशन सेंटर में मुगल बादशाह बाबर के दौर में लगवाए गए पौधों, जहांगीर के काल में नाम में हुए बदलाव, ब्रिटिश काल में संरक्षण और स्मारक को गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल करने जैसी जानकारियों के साथ चारबाग शैली के बारे में बताया गया है।
समरकंद की चारबाग शैली में बनवाए गए देश के पहले बगीचे रामबाग में इंटरप्रिटेशन सेंटर का शनिवार को शुभारंभ किया गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के क्षेत्रीय निदेशक वसंत कुमार स्वर्णकार ने इंटरप्रिटेशन सेंटर का उद्घाटन किया और उम्मीद जताई कि रामबाग भ्रमण करने वाले पर्यटक इसके इतिहास से पूरी तरह से रूबरू हो सकेंगे। मुगल बादशाह बाबर ने 500 साल पहले वर्ष 1526 में रामबाग बनवाया था। पांच शताब्दियों का सफरनामा इस सेंटर में उन्हें नजर आएगा।
विज्ञापन
रामबाग स्मारक के प्रवेश द्वार पर टिकट खिड़की के पास ही यह इंटरप्रिटेशन सेंटर (व्याख्या केंद्र) बनवाया गया है। इसमें मुगल बादशाह बाबर के दौर में लगवाए गए पौधों, जहांगीर के काल में नाम में हुए बदलाव, ब्रिटिश काल में संरक्षण और स्मारक को गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल करने जैसी जानकारियों के साथ चारबाग शैली के बारे में बताया गया है।
क्षेत्रीय निदेशक वसंत कुमार ने अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. स्मिथा कुमार के साथ सेंटर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को प्रवेश से पहले ही रामबाग की बुनियादी जानकारियां यहां उपलब्ध हो सकेंगी। रामबाग का निर्माण वर्ष 1526 में शुरू हुआ था। तब इसका नाम बाग ए हश्त-बिहिश्त था, जो बाद में रामबाग के नाम से चर्चित हो गया। सेंटर के उद्घाटन के दौरान सहायक पुरातत्वविद जितेंद्र कुमार, पुरातत्व अभियंता राज नारायण और वरिष्ठ संरक्षण सहायक अंकित नामदेव मौजूद रहे।