अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर ताजनगरी 'कोरोना से जंग...योग के संग' लड़ने को तैयार है। इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सिकंदरा स्थित डावर शू फैक्ट्री के मैदान में रविवार की सुबह सात बजे योग शिविर लगेगा। अमर उजाला आगरा के फेसबुक पेज पर इसको लाइव दिखाया जाएगा।
शिविर में योग आचार्य देवेंद्र धाकरे योगासन और प्राणायाम कराएंगे। इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोग योग करेंगे। अमर उजाला आगरा के फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए आप इस लिंक
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देवेंद्र धाकरे ने बताया कि योग की महिमा ऋषियों का वरदान है। इसे सभी को अपनी दिनचर्या में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, सामाजिक दूरी और उत्तम स्वास्थ्य के माध्यम से कोरोना जैसी महामारी से बचा जा सकता है। कोरोना से जंग में योग एवं आयुर्वेद पद्धति ही एकमात्र आशा की किरण बनी हुई है।
सोशल डिस्टेंसिंग का करें पालन: क्रीड़ा भारती
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए क्रीड़ा भारती की शनिवार को बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगठन मंत्री रोहित ने पदाधिकारियों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन करने का आह्वान किया। पदाधिकारियों ने 30 हजार लोगों द्वारा योग करने का दावा किया है।
संगीत कला केंद्र में होगा नाद योग
शहर के हजारों लोग जहां घर की छतों और कालोनी के पार्कों में योग कर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएंगे, वहीं शास्त्रीपुरम के संगीत कला केंद्र में नाद योग किया जाएगा। इसमें सात साल से लेकर 25 साल तक के युवा संगीत साधक नाद योग का प्रदर्शन करेंगे।
बीडी जैन गर्ल्स डिग्री कालेज के संगीत विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष केशल तलेगांवकर का कहना है कि नाद योग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि हर साल संगीत कला केंद्र की ओर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नाद योग किया जाता है।
उन्होंने बताया कि नाद का संबंध ध्वनि से है। रक्त प्रवाह पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तलेगांवकर का कहना है कि कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण योग कार्यक्रम के बदले स्वरूप के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
क्या है नाद योग
नाद योग के प्रणेता भगवान शिव हैं। इस योग में ओमकार और मंत्रोच्चारण होता है। पहले तीन चरणों उद्दात, अनउद्दात और स्वरित में वैदिक मंत्र बोले जाते हैं। नाद योग मानसिक रूप से लोगों को स्वस्थ रखता है। नाद योग करने से वर्तमान पीढ़ी को भी ओमकार और वैदिक मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करने को मिलता है। ओमकार ध्वनी के पांच स्वर अकार, आकार, उकार, इकार और ओंकार होते हैं।