जिम्नास्टिक में देश का नाम ऊंचा कर रहीं आरती
गांव मुईद्दीनपुर निवासी आरती यादव जिम्नास्टिक की खिलाड़ी हैं। उन्होंने यूपी की टीम से चार बार कलकत्ता, दो बार हैदराबाद और एक बार आगरा में सब जूनियर नेशनल मैच खेले हैं। जूनियर नेशनल मैच में उत्तर प्रदेश के लिए आरती ने सिल्वर मेडल जीता था।
सीनियर वर्ग में भी यूपी की टीम से आरती अपना परचम फहरा चुकी हैं। हाल में वे ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर पर खेलीं और तीसरे नंबर पर रही हैं। वर्तमान में वह अमृतसर में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खेल में शामिल होने गई हैं। आरती ने बताया कि प्रयास है कि वह ओलंपिक खेलें और देश के लिए स्वर्ण पदक जीत कर लाएं।
बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ना लक्ष्य
बालिका शिक्षा एवं सशक्तिकरण की लड़ाई लड़ रहीं शिक्षिका मूवी शर्मा का फोकस दलित और अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं पर है। मूवी को भारतीय बौद्ध संघ द्वारा नई दिल्ली में केंद्रीय इस्पात मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते एवं संसदीय कार्य एवं संस्कृति मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के हाथों वीरांगना झलकारी बाई रत्न से सम्मानित किया गया।
परिषदीय शिक्षा से जुड़ीं मूवी चूड़ी जुड़ाई, झलाई आदि कामों के जरिए आजीविका चलाने वालीं दलित व अति पिछड़े वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ का काम कर रही हैं। रविवार को किसी ने किसी मलिन बस्ती में बालिकाओं को पढ़ाई के लिए जागरुक करती हैं।
कांच निर्यात के क्षेत्र में रितिका ने बनाई पहचान
उच्च शिक्षित रितिका ने अच्छे पद पर नौकरी करने की जगह उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा। फै शन डिजाइनिंग व कम्प्यूटर साइंस में स्नातक रितिका जैन ने निजी उद्यम के सहारे चंद्र ग्लास की स्थापना की। वे फ्रांस और अमेरिका में तमाम तरह के उत्पादों का निर्यात करतीं हैं।
स्वदेशी कंपनियां रिलायंस, डीएलएस, विदेश के रिटेलर शोरूम मैकडोनाल्ड आदि से भी चंद्रा ग्लास को काष्ठ और कांच से निर्मित किचिन वेयर, होटल-शोरूम में फैंसी ग्लास आयटम के अतिरिक्त बाथरूम एसेसरीज सप्लाई के आर्डर मिलते हैं। रितिका के मुताबिक करीब दो वर्ष पूर्व स्थापित कंपनी 500 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार करती है।
दिव्यांग ललितेश प्रीती ने जीवन में संघर्षकर की
बोधाश्रम रोड, कमला नेहरू स्कूल के पास रहने वाली दिव्यांग ललितेश प्रीती ने अभावों के बीच एलएलबी तक की पढ़ाई पूरी की। परिवार में बड़ी होने के कारण उन पर घर का बोझ था। 2014 में रजिस्ट्रेशन कराने के साथ विधिवत काम प्रारंभ कर दिया।
ललितेश ने बताया कि वह दिव्यांग होने के बाद भी कैलीपर्स के माध्यम से न्यायालय से घर आती-जाती हैं। परिवार में दो छोटी बहनें रिचा सिंह एमएड, टीना एमए कर चुकी हैं। छोटे भाई दिग्बहादुर सिंह व पुष्पेंद्र सिंह पढ़ाई कर रहे हैं। पिता दिगेंद्र भानु प्रताप सिंह भाष्कर समाजसेवी हैं। वर्तमान में वह जनपद न्यायालय में स्थाई लोक अदालत की सदस्य हैं।