पेरिस समझौता-2015 के अनुसार वैश्विक तापमान वृद्धि को भविष्य में दो डिग्री सेल्सियस से कम रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर ऊर्जा को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसमें चीन व अमेरिका जैसे देश अग्रणी है।
भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर, मैसूर के वरिष्ठ वैज्ञानिक मधुसूदन ने आरबीएस इंजीनियरिंग संकाय में शुक्रवार को ‘रोल ऑफ रिन्यूएबल एंड न्यूक्लियर एनर्जीज फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’विषय पर विचार रखे।
उन्होंने कहा कि गैर नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग करके ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कई गुना तक कम किया जा सकता है। आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के शोधार्थी अमन सचदेवा ने ‘एफिशिएंट सोलर पावर्ड कूलिंग सिस्टम फॉर ग्रीन हाउसेस इन इंडिया’पर शोधपत्र प्रस्तुत किया।
भारतीय विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग नई दिल्ली की शोधार्थी श्वेता गुप्ता ने ‘इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट बाई कंटीन्यूअस फिक्स्ड बैड कॉलम फॉर द रिमूवल ऑफ कैडमियम आयंस’पर व्याख्यान दिया। कुल 45 शोधपत्र और 20 पोस्टर प्रस्तुत किए गए।
अध्यक्षता वैज्ञानिक डॉ. वीरबल सिंह ने की। कार्यक्रम में संगोष्ठी की समन्वयक डॉ. श्रद्धारानी सिंह, निदेशक डॉ. बीएस कुशवाह व डॉ. पंकज गुप्ता की उपस्थिति रही।