बेरोजगार युवाओं को नाैकरी के नाम पर वियतनाम, कंबोडिया और लाओस भेजकर चीनी साइबर ठगों को बेचने वाले गिरोह के एक और एजेंट आमिर खान सरगुरु को पुलिस ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी से गिरफ्तार किया है।
आगरा पुलिस ने ऐसे गैंग का खुलासा किया है, जो विदेशों में भारतीय युवकों को बेचता है। इस गैंग एक और शातिर पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। उसे पुलिस ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी से गिरफ्तार किया है।
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हर अपराध का अलग किरदार
साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को शिकार बनाते हैं। इनमें डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग और हनी ट्रैप अधिक हैं। सरगना भारत के साथ ही पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के युवाओं को खरीदते हैं। एक बार उनके कार्यालय में आने के बाद टेस्ट लिया जाता है। फिल्मों की तरह सीन होता है, उसी तरह के किरदार भी बनाए जाते हैं, उसी तरह युवाओं को जिम्मेदारी भी दी जाती थी।
अलग-अलग स्क्रिप्ट
अलग-अलग क्राइम के लिए अलग-अलग स्क्रिप्ट को पढ़वाकर देखा जाता था। युवक जिस स्क्रिप्ट को अच्छे से याद करते थे, उसे उसी प्रकार का साइबर अपराध करने की जिम्मेदारी दी जाती थी। जो लोग तैयार हो जाते थे, उन्हें प्रतिमाह 45 से 60 हजार रुपये और अलग से कमीशन भी दिया जाता था। जिस बिल्डिंग में कार्यालय संचालित हो रहे हैं, उनमें हर फ्लोर पर अलग अपराध के लिए युवक रहते हैं। वहीं डिजिटल अरेस्ट के लिए अलग-अलग कमरों में पुलिस, सीबीआई, आयकर विभाग की तरफ कार्यालय बना रखे हैं।
एजेंट से की जा रही है पूछताछ
अपर पुलिस उपायुक्त नगर आदित्य सिंह ने बताया कि विदेश में नाैकरी का झांसा देकर साइबर ठगों के चीनी सरगनाओं को युवाओं के बेचने वाले गिरोह के एक और एजेंट आमिर खान को रत्नागिरी से आगरा लाया गया है। उससे पूछताछ की गई है। गिरोह के और भी लोगों के नाम सामने आए हैं। इन सभी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
साढ़े चार लाख रुपये लेकर भेजे गए
साइबर सेल में शिकायत करने वाला मलपुरा का अखिल स्नातक पास है। वह वर्ष 2024 में कंबोडिया गया था। पुलिस को बताया कि वहां पहुंचने पर उसे पता चला कि गिरोह साइबर ठगी करा रहा है। उसे एक कंपनी के ऑफिस में ले जाकर बंधक बना लिया गया। उसने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास को ईमेल करके मदद की गुहार लगाई। इस पर उसे मंत्रालय के प्रयास से रेस्क्यू कराया गया। 16 दिन बाद वो भारत आ सका था। उसके साथ कानपुर के इमरान और समीर भी वापस आए थे। उन तीनों को आरोपी आमिर खान ने 4.50-4.50 लाख रुपये लेकर विदेश भेजा था। इसके बाद साइबर गिरोह के सरगना से भी 4500 डाॅलर तक लिए थे।
कर्ज लेकर विदेश गए थे, अब क्या करेंगे?
पीड़ित युवक बुधवार को साइबर सेल पहुंचे। इनमें से चार युवक मलपुरा के हैं। उन्होंने बताया कि विदेश भेजने के लिए एजेंटों ने उन्हें कई सपने दिखाए। उन्हें लग रहा था कि हर महीने अच्छी कमाई होगी। खर्च के बाद जो बचेगा उसे परिवार में भेज देंगे। मगर विदेश पहुंचने के बाद साइबर ठगी कराने वाले गिरोह का पता चला। वह किसी तरह वापस आ सके। गांव वापस आने के बाद लोग तरह-तरह की बात करने लगे। उन्होंने एजेंटों को रकम देने के लिए कर्ज लिया था। किसी ने खेत और मकान तक गिरवी रख दिया था। अब वापस आए तो नाैकरी भी नहीं है। उन्हें डर सता रहा है कि कैसे कर्ज चुका पाएंगे। अगर पुलिस आरोपियों के खातों से जानकारी ले तो उनसे रकम ली जा सकती है।