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सपा-बसपा गठबंधन से ब्रज में दिलचस्प हुई 'कुर्सी' की जंग, ये हैं चुनावी आंकड़े

Sun, 13 Jan 2019 11:48 AM IST
मुकेश कुमार राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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अखिलेश यादव और मायावती - फोटो : अमर उजाला
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सपा और बसपा के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो चुकी है। अब दोनों पार्टियां 2019 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ेंगी। माना जा रहा है कि गठबंधन से ब्रज में सपा-बसपा दोनों को ताकत मिलेगी। 

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कई सीटों पर भाजपा के लिए चुनौती बढ़ेगी। आंकड़े बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले के चुनावों में दोनों पार्टियों को ब्रज में खूब वोट मिलते रहे हैं। हालांकि 2014 में सपा-बसपा दोनों पर भाजपा भारी थी।
 
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा की बंपर जीत के लिए मोदी लहर को श्रेय दिया गया। तब कांग्रेस और रालोद एक साथ थे। भाजपा, सपा और बसपा तीनों पार्टियों ने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। 

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मोदी लहर में भाजपा ने ब्रज की छह सीटें जीतीं

मोदी लहर में ब्रज की आठ में से छह सीटों पर भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए थे। स्थिति यह थी कि फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद और मैनपुरी सीट को छोड़कर आगरा, अलीगढ़, एटा, हाथरस व मथुरा में भाजपा प्रत्याशियों को सपा-बसपा दोनों के प्रत्याशियों से ज्यादा वोट मिले थे। 

फिरोजाबाद और मैनपुरी लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशी जीते थे। हालांकि, इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में इन आठ जिलों में सिर्फ आगरा लोकसभा सीट ही भाजपा के खाते में थी। शेष सात में से दो (फतेहपुर सीकरी व अलीगढ़) पर बसपा, एक निर्दलीय (एटा), दो सपा (फिरोजाबाद व मैनपुरी) और दो (हाथरस व मथुरा) पर रालोद का कब्जा था। 

भाजपा और रालोद ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। तब भाजपा ने हाथरस और मथुरा में अपने प्रत्याशी नहीं उतारे थे। सपा ने भी भाजपा से अलग होकर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे कल्याण सिंह के खिलाफ एटा में अपना प्रत्याशी नहीं खड़ा किया था। 

2009 में भाजपा पर सपा बसपा भारी

सपा ने मथुरा में भी उम्मीदवार नहीं उतारा था। अगर, 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा प्रत्याशियों को मिले वोट जोड़कर देखें तो भाजपा काफी पीछे नजर आती है। सिर्फ आगरा सीट पर भाजपा, बसपा से आगे थी। 

इसके अलावा फतेहपुर सीकरी में बसपा व कांग्रेस, अलीगढ़ में बसपा, सपा, कांग्रेस, एटा में निर्दलीय व बसपा, फिरोजाबाद में सपा, बसपा, मैनपुरी में सपा व बसपा से पीछे थी। 

2014 के लोकसभा चुनाव में मिले वोट
सीट  भाजपा को मिले वोट  सपा व बसपा को मिले वोट
आगरा   5,83,716  4,18,158
फतेहपुर सीकरी  4,26,589 4,66,880
अलीगढ़ 5,14,622   4,54,170
एटा  4,74,978  4,11,104
फिरोजाबाद 4,20,524  6,53,492
हाथरस  5,44,277  3,98,782
मैनपुरी 2,31,252     7,38,751
मथुरा 5,74,633 2,10,245


 

2009 के लोकसभा चुनाव में मिले वोट

सीट भाजपा को मिले वोट   सपा व बसपा को मिले वोट
आगरा 2,03,697   3,35,349
फतेहपुर सीकरी 1,54,373 3,18,706
अलीगढ़ 1,26,988  3,70,331
एटा 88,562 1,47,449 (सिर्फ बसपा)
फिरोजाबाद 1,01,561  5,06,721
हाथरस 2,47,927 (रालोद) 3,26,262
मैनपुरी 56,265  6,11,546
मथुरा 3,79,870 (रालोद)  2,10,257 (सिर्फ बसपा)
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भाजपा के साथ मिलकर रालोद ने खूब बटोरे थे वोट

रालोद ने 2009 का लोकसभा चुनाव भाजपा के समर्थन से लड़ा था। तब मथुरा और हाथरस सीट पर उसे खूब वोट मिले थे। दोनों सीटों पर रालोद प्रत्याशी विजयी हुए थे। 

मगर, 2014 के लोकसभा चुनाव में रालोद ने कांग्रेस से हाथ मिलाया। इसमें फतेहपुर सीकरी सीट पर रालोद ने चुनाव लड़ा था। तब रालोद प्रत्याशी अमर सिंह की जमानत जब्त हो गई थी। मथुरा में जयंत चौधरी दूसरे नंबर पर रहे थे। 

यह गठबंधन एक नया इतिहास रचेगा। भाजपा प्रत्याशियों को अपनी जमानत तक बचाना मुश्किल होगा। प्रदेश में एक भी सीट पर भाजपा प्रत्याशी जीत का स्वाद नहीं चख सकेगा। पश्चिमी यूपी में सपा और बसपा प्रत्याशी जीत का परचम लहराएंगे।
रामजी लाल सुमन, राष्ट्रीय महासचिव, सपा

सपा-बसपा का गठबंधन भाजपा को जड़ से खत्म कर देगा। गठबंधन के धर्म को निभाते हुए प्रत्येक सपा कार्यकर्ता गठबंधन के प्रत्याशी को जिताने के लिए दिन-रात एक कर देगा। भाजपा सरकार की तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंकने में अहम भूमिका निभाएगा यह गठबंधन।
रामसकल गुर्जर, पूर्व मंत्री, सपा नेता
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