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Agra News: बौद्धिक संपदा अधिकार से विश्वस्तरीय बनेंगे भारतीय उत्पाद

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बौद्धिक संपदा अधिकार कार्यशाला में अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान करते एमएसएमई अधिकारी स्त्रोत
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आगरा। जूता हो या पेठा। ताला हो या कोई अन्य उत्पाद। बौद्धिक क्षमता से ही दुनियाभर में पहचाने जाएंगे। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए बौद्धिक संपदा अधिकार से ही उत्पाद विश्वस्तरीय बनेंगे। ये बातें सोमवार को एमएसएमई-पीपीडीसी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्धाटन सत्र को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के संयुक्त निदेशक बीके वर्मा ने कहीं।
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खंदारी स्थित एक होटल में दो दिवसीय बौद्धिक संपदा कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के प्रधान निदेशक सचिन राजपाल ने बताया कि कोई भी पेटेंट, ट्रेडमार्क, डिजाइन, लोगो, कॉपीराइट और जीआई टैग बौद्धिक संपदा है। देशभर में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा के लिए बौद्धिक संपदा का खास महत्व है। उन्होंने सरकार की तमाम योजनाएं बताईं और उनमें पंजीकरण से लेकर निर्यात व अन्य अनुदान के बारे में जानकारी दी।
आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा ने कहा कि विकसित भारत 2047 का विजन बौद्धिक संपदा से ही पूरा होगा। उन्होंने बौद्धिक संपदा के प्रति स्कूल के छात्र-छात्राओं को जागरूक करने का सुझाव रखा। बौद्धिक संपदा की पहचान, संरक्षण और प्रभावी उपयोग से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा।
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सरदार भगत सिंह पेठा कुटीर उद्योग के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि आगरा के पेठे को जीआई टैग मिल चुका है। अब पेठा आगरा के नाम से पहचाना जा रहा है। तालानगरी अलीगढ़ से आए नेतराम शर्मा ने कार्यशाला में व्यापारियों की मौजूदगी अपेक्षा से कम रहने पर चिंता व्यक्त की। प्रक्रिया एवं उत्पाद विकास केंद्र (पीपीडीसी) के सहायक निदेशक अमित चोपड़ा ने बताया कि मंगलवार को विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे। नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के अध्यक्ष संजय गोयल, समीर अग्रवाल, यतेंद्र कुमार, प्रमोद महाजन, ओम प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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