केएमआई में दुर्लभ पांडुलिपि और प्राचीन सिक्कों की स्कैनिंग के दौरान इस सिक्के की पहचान हुई। ग्रीको-बैक्ट्रियन साम्राज्य के अंतिम इंडो-ग्रीक शासकों तक प्रचलन में रहे ये सिक्के उनके इतिहास और व्यापारिक पहुंच के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत हैं।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के केएमआई में बने संग्रहालय में प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व के इंडो-बैक्ट्रियन सिक्के की पहचान हुई है। 1,460 दुर्लभ पांडुलिपि और सिक्कों की स्कैनिंग के दौरान इसे चिह्नित किया गया है। ग्रीको-बैक्ट्रियन साम्राज्य के अंतिम इंडो-ग्रीक शासकों तक प्रचलन में रहे ये सिक्के उनके इतिहास और व्यापारिक पहुंच के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत हैं। संग्रहालय में यह प्राचीनतम सिक्का है। इसकी सूचना पर कुलपति ने भी निरीक्षण किया।
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कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि संस्थान के पास 1460 दुर्लभ पांडुलिपि, सिक्के और अन्य दस्तावेज हैं। इनकी स्कैनिंग की जा रही है। केमिकल से संरक्षित किया जा रहा है। नागपुर स्थित हैरिटेज फाउंडेशन की टीम यह काम कर रही है। अभी तक 460 पांडुलिपियों, सिक्कों और दस्तावेज की स्कैनिंग और संरक्षण का काम पूरा हो चुका है। इसी दौरान इंडो-बैक्ट्रियन सिक्के की पहचान हुई। इसके एक ओर शासक और दूसरी ओर ग्रीक देवता का चित्र अंकित है। ताम्रपत्र की तरह ग्रीक भाषा में लेख भी लिखा है। यह सिक्का प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से प्रथम शताब्दी ईसा के मध्य का है। सिक्का संग्रहालय का प्राचीनतम सिक्का है। कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि इंडो-बैक्ट्रियन सिक्के की पहचान होना बड़ी बात है। ये दुर्लभ सिक्का है, जो विश्वविद्यालय की धरोहर है।
संग्रहालय में हैं प्राचीन ग्रंथ, सिक्के और नक्शा
संग्रहालय के अनुदेशक उपेंद्र पचौरी ने बताया कि संग्रहालय में जोधपुर के राजाओं से संबंधित तैमूरशाह समरकंद की वार्ता, कुतुबुद्दीन शाहजादा की वार्ता, सिखों का इतिहास, चाणक्य नीति, वेद, शाहजहांकालीन आगरा की इमारतों का मानचित्र, दिल्ली के लाल किले का मानचित्र और कई रियासतों के प्राचीन सिक्के हैं। संस्थान में इनको निशुल्क देखा जा सकता है।
ये हैं इंडो-बैक्ट्रियन का महत्व
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष और इतिहासकार प्राे. सुगम आनंद ने बताया कि ग्रीको-बैक्ट्रियन और इंडो-ग्रीक राजाओं ने आधुनिक अफगानिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, पूर्वी ईरान पर शासन किया था। ग्रीको-बैक्ट्रियन साम्राज्य के अंतिम इंडो-ग्रीक शासकों तक प्रचलन में रहे सिक्के उनके इतिहास और व्यापारिक पहुंच के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत हैं। ग्रीको-बैक्ट्रियन राजा डेमेट्रियस ने 200 ईसा पूर्व पश्चिम भारत पर आक्रमण कर चांदी-तांबे के सिक्के ढाले थे। इनमें शासक का नाम, उपाधि और देवता अंकित हैं। इंडो-बैक्ट्रियन शासकों ने शुरू में बैक्ट्रिया और बाद में उत्तर-पश्चिम भारत पर शासन किया। ये सिक्के लगभग 250 ईसा पूर्व से ढाले जा रहे थे। भारत में इनके आकार, वजन और कलात्मक गुणवत्ता में बदलाव किया गया था।